Kohramlive : नये इतिहास की सबसे स्याह इबारत ईरान में लिखी जा रही है। सपनों, सवालों और सुकून की मांग कर रहे लोगों पर ऐसी गोलियां बरसीं कि पूरा मुल्क सहम उठा। हालिया विरोध प्रदर्शनों में सुरक्षा बलों की खूनी कार्रवाई ने ईरान को एक बार फिर 1979 की इस्लामी क्रांति के भयावह दिनों की याद दिला दी है। ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अबतक 2,571 लोग मारे जा चुके हैं। इसमें 2,403 प्रदर्शनकारी, 147 सुरक्षा कर्मी, 12 मासूम बच्चे, 9 आम नागरिक शामिल हैं। 18,100 से ज्यादा लोग हिरासत में लिये गये हैं। यह आंकड़े दशकों में ईरान के किसी भी विरोध आंदोलन से कहीं ज्यादा भयावह हैं। बीते साल जून में इजराइल द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर 12 दिनों तक की बमबारी ने हालात को और विस्फोटक बना दिया। इस हिंसा के चलते स्कूलों पर ताले लटक रहे हैं, गोलियों की आवाज से बच्चे सहम रहे हैं। लोग घरों में कैद होकर जीने को मजबूर हैं। इस बीच अमेरिका ने चेताया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या पर सैन्य कार्रवाई हो सकती है। वहीं, ईरान ने 100 सुरक्षा कर्मियों का सामूहिक अंतिम संस्कार कर शक्ति का संदेश दिया। सरकारी संचार ठप है, लेकिन स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट लोगों की आवाज बना है। अधिकारियों ने स्टारलिंक डिश की तलाश शुरू की है। कई इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है।













