RANCHI: झारखंड हाई कोर्ट ने बुधवार को छठी JPSC सिविल सेवा के 346 अधिकारियों के बारे में बुधवार को बड़ा निर्णय किया है। डबल बेंच ने एकल बेंच के फैसले को बरकरार रखते हुए दोबारा सुनवाई के लिए दायर याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि एकल बेंच के आदेश में हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है। कोर्ट के फैसले से राहत की उम्मीद लगाए बैठे 326 सफल अभ्यर्थियों का बड़ा झटका लगा है।
एकल बेंच ने नियुक्ति को बताया था अवैध
इससे पहले एकल बेंच ने इस मामले में सुनवाई करते हुए JPSC द्वारा जारी मेरिट लिस्ट को रद्द करते हुए 326 अभ्यर्थियों की नियुक्ति को अवैध करार दे दिया था। एकल बेंच के फैसले के खिलाफ कुछ लोगों ने डबल बेंच में अपील याचिका दायर की। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ.रवि रंजन और जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत ने इस मामले में सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने आज अपना फैसला सुनाया है।
पूर्व के फैसले को दी गई थी चुनौती
बता दें कि एकल बेंच ने माना था कि पेपर वन में सिर्फ क्वालिफाई मार्क्स लाना था, लेकिन JPSC ने इसे कुल प्राप्तांक में जोड़ दिया, यह गलत है। इसके बाद नियुक्त हुए 326 अभ्यर्थियों की ओर से इस आदेश के खिलाफ खंडपीठ में अपील दाखिल की गई थी सुनवाई के दौरान सरकार ने कहा था कि वह एकल पीठ के आदेश का पालन करेगी।
प्रार्थियों नेशजेपीएससी की लिस्ट को बताया था सही
प्रार्थियों का कहना था कि JPSC की ओर से जारी किया गया रिजल्ट बिल्कुल सही है और इसमें कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी थी। एकल पीठ के आदेश को गलत बताते हुए उस आदेश को निरस्त करने की गुहार लगाई गई थी।
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