Giridih : जब शहर की रफ्तार धीमी हो चली थी, जब नींद ने नगर को अपनी बाहों में जकड़ लिया था, तभी गिरिडीह केंद्रीय कारा के फाटक पर आहट हुई। ना कोई हलचल, ना कोई शोर, बस एक सन्नाटा, जिसे चीरती हुई आईं DC रामनिवास यादव और SP डॉ. विमल कुमार की गाड़ियां। पीछे-पीछे 40 अफसर और 123 सशस्त्र जवान। देर रात
जब जेल की दीवारें नींद में लिपटी थीं, तब एक-एक कर पुरुषों के पांच ब्लॉक और 20 वार्ड खोले गये। हर कोना, हर चारपाई, हर कंबल, जैसे अतीत की परतें खोली जा रही हों। महिला वार्ड में प्रवेश करते ही महिला पुलिसकर्मियों ने सच की तलाश शुरू की। हर दराज, हर थैली, हर संदूक टटोला गया, पर न कोई मोबाइल, न चाकू, न ड्रग्स, सिर्फ कुछ पुड़िया खैनी मिली, CCTV की आंखें, संतरी की सजगता, कहां से दरार शुरू होती है, सब कुछ परखा गया। करीब दो घंटे तक तलाशी ली गई।
काले पर्दों के पीछे, आधी रात दस्तक
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