Bihar : मोकामा के पूर्व विधायक और बिहार की सियासत में ‘छोटे सरकार’ के नाम से चर्चित अनंत सिंह को गुरुवार को उस समय बड़ी राहत मिली जब एक स्थानीय अदालत ने वर्ष 2023 में हुये रघुनाथ प्रसाद सिंह गोलीकांड के मामले में उन्हें आरोपमुक्त कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि महज नामजद कर देना पर्याप्त नहीं है, साजिश साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य चाहिये। 2023 में जब भदौर थाना क्षेत्र में दिन-दहाड़े रघुनाथ प्रसाद सिंह को गोली मारी गई, तो पूरा इलाका सन्न रह गया था। आरोप सीधे मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह पर लगे, कहा गया कि उन्होंने जेल में रहते हुये यह हमला करवाया। पीड़ित पक्ष ने दावा किया कि साजिश सलाखों के पीछे से रची गई थी, जिससे राजनीतिक तापमान और भी बढ़ गया।
लेकिन जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, तथ्यों की तस्वीर साफ होती चली गई। पुलिस अनुसंधान में यह स्पष्ट हुआ कि घटना के समय अनंत सिंह बेउर जेल में बंद थे और उनके किसी भी सहयोगी की संलिप्तता की पुष्टि नहीं हो सकी। ऐसे में अदालत ने कानूनी कसौटी पर जांच रिपोर्ट और साक्ष्यों का मूल्यांकन करते हुये यह साफ कर दिया कि नामजदगी किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है।
इस फैसले ने अनंत सिंह के समर्थकों को राहत की सांस दी है। खास बात यह है कि यह निर्णय उस समय आया है जब बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और वोटर वेरिफिकेशन का कार्य ज़ोरों पर है। ऐसे में ‘छोटे सरकार’ की यह रिहाई सियासी सरगर्मी को नया मोड़ दे सकती है।






