Bihar : बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। NDA के भीतर मुख्यमंत्री की कुर्सी अब “दिल मांगे मोर” की तर्ज पर कई दिलों का अरमान बन गई है, लेकिन तस्वीर साफ नहीं, बल्कि और धुंधली हो चली है। विजय सिन्हा का तीखा तंज अब ‘फिल्मी नायक’ नहीं, असली ‘जनसेवक’ चाहिये। पटना की दोपहर, प्रेस की भीड़, कैमरों की चमक… और विजय कुमार सिन्हा का बयान जैसे बारूद की चिंगारी। अब कोई अभिनेता बिहार का सीएम नहीं बनेगा, बिहार को नायक चाहिये, खलनायक नहीं।” उनका इशारा चिराग पासवान की तरफ था। जिन्होंने कभी रील लाइफ में हीरो बनने की कोशिश की थी, लेकिन अब रियल लाइफ में सत्ता का सपना देख रहे हैं।
कौन होगा असली वारिस?
विजय सिन्हा के शब्दों में तंज था, “जो बाप-माय के नाम पर राजनीति कर रहे हैं, उनसे जनता मुक्ति चाहती है।”
इस पर चिराग पासवान ने मीडिया से कहा कि “मेरी प्राथमिकता बिहार है। मैं केंद्र नहीं, अपने लोगों के बीच रहना चाहता हूं।” इस बीच एलजेपी (रामविलास) और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच अब सोशल मीडिया पर तलवारें खिंच चुकी हैं। ‘तू-तू मैं-मैं’ की जगह अब ‘पोस्ट बनाम पोस्ट’ की जंग है।












