Kohramlive : उत्तराखंड के चमोली में प्रकृति का रौद्र रूप सामने आया है। माणा गांव और बद्रीनाथ के बीच आये भयावह हिमस्खलन ने 57 मजदूरों को अपने सफेद कैद में जकड़ लिया। BRO के इन कर्मियों का शिविर पूरी तरह से बर्फ में दब गया और चारों ओर बस एक ही आवाज गूंज रही थी—बचाओ! रेस्क्यू ऑपरेशन का सफर आसान नहीं था। लगातार गिरती बर्फ, हाड़ कंपा देने वाली ठंड और मुश्किल होते हालातों के बावजूद सेना, ITBP और NDRF की टीमों ने कड़ी मेहनत कर अब तक 32 मजदूरों को सही-सलामत बाहर निकाला है। वहीं, 25 अभी भी बर्फ के नीचे फंसे हैं।
सेना के ब्रिगेडियर मंदीप ढिल्लों के हवाले से मीडिया में आई खबर के अनुसार, बचाव कार्य के लिये सुबह 8 बजे से ही टीम जुटी हुई है। 150 से अधिक जवान इस ऑपरेशन में लगे हैं और हम तब तक चैन से नहीं बैठेंगे, जब तक हर फंसे हुये इंसान को बाहर नहीं निकाल लेते। इसी बीच, उत्तराखंड के CM पुष्कर सिंह धामी ने हालात की गंभीरता को देखते हुये राहत-बचाव कार्यों को तेज करने और आपदा कंट्रोल रूम स्थापित करने के निर्देश दिये हैं। CM ने घायलों को तुरंत हेलीकॉप्टर से एम्स ऋषिकेश या अन्य अस्पतालों में शिफ्ट करने के लिए एमआई-17 हेलीकॉप्टर तैनात करने को भी कहा है।
राजनीतिक गलियारों से लेकर सेना तक अलर्ट
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद इस मामले की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने DG आईटीबीपी और DG NDRF से बात कर यह सुनिश्चित किया कि बचाव कार्य में किसी भी तरह की देरी न हो। उधर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी स्थिति पर चिंता जाहिर करते हुये भरोसा दिलाया कि सेना के सभी संसाधनों का उपयोग कर बचाव कार्य को सफल बनाया जायेगा।बताया जा रहा है कि माणा गांव और बद्रीनाथ के बीच पिछले दो दिनों से मौसम खराब था। मजदूर कंटेनरों में ही रह रहे थे, लेकिन सुबह करीब सवा सात बजे आये हिमस्खलन ने सबकुछ बदल दिया। कुछ मजदूर बद्रीनाथ की ओर भागने में सफल रहे, लेकिन बाकी बर्फ की सफेद चादर में समा गये। हर कोई यही दुआ कर रहा है कि बर्फ के नीचे दबी हर जिंदगी को सही सलामत बाहर निकाल लिया जाये।












