New Delhi : नई दिल्ली की तपती दोपहरी में जैसे ही यह खबर आई, हवा में सिहरन दौड़ गई, “जिसने हमें दर्द दिया, “हां, वही तहव्वुर हुसैन राणा। नाम वही है, जो 26/11 की उस खौफनाक रात की दरिंदगी से जुड़ा हुआ है। वो रात जब समंदर किनारे बसी मायानगरी की रगों में लहू की जगह सन्नाटा बहने लगा था। अब वही राणा, जो वर्षों से अमेरिका की जेल में अपनी किस्मत की रेखाएं देखता रहा, भारत लाया जायेगा। अमेरिका की सबसे बड़ी अदालत, सुप्रीम कोर्ट ने उसकी कराहती अपीलों को सिरे से खारिज कर दिया। उसने कहा, “मैं अल्पसंख्यक हूं, भारत में खतरा है,” लेकिन याचिका खारिज हो गई।
तहव्वुर राणा… एक ऐसा किरदार जो पर्दे के पीछे से खेल खेलता रहा। पाकिस्तानी मूल का ये कनाडाई नागरिक, डेविड कोलमैन हेडली का हमराज था, वही हेडली, जिसने 2008 की उस खूनी पटकथा को रचा था। और राणा? वो था उसका भरोसेमंद साजिशकार। अब उसे उसी धरती पर लाया जायेगा, जिसके जख्मों में उसकी साजिश की बू अब तक ताजा है।
अब कहानी पलटेगी…
राणा के लौटने से सच्चाई की जंजीरें खुलेंगी, और पर्दों के पीछे बैठे कई चेहरे बेनकाब होंगे। भारत की जांच एजेंसियां तैयार हैं। वो पूछेंगी हर सवाल, टटोलेंगी उसकी आंखों में छुपी हर परछाईं, और ढूंढ़ेंगी उन दरिंदों के चेहरे जो आज भी अंधेरे में हैं।
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