KohramLive : आंदोलनकारी किसानों को दिल्ली में एंट्री रोकने की खातिर संभवतः पहली बार गजब का जुगाड़ किया गया है। भीड़ को तितर-बितर करने के लिये साउंड कैनन का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी पूरी तैयारी की जा रही है। साउंड कैनन को लॉन्ग-रेंज एकॉस्टिक डिवाइस (LRAD) के नाम से भी जाना जाता है। साउंड कैनल का इस्तेमाल ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, ब्रिटेन, स्पेन, पोलैंड, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, जापान, ग्रीस एवं जर्मनी जैसे देशों में समय-समय पर होते रहता है। ऑस्ट्रेलिया में कैनबरा के 2022 के कोरोना वैक्सीन से जुड़े प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किया गया था।
क्या है साउंड कैनन जानें
साउंड कैनन एक खास तरह का लाउडस्पीकर है, जो बहुत दूर तक तेज आवाज यानी शोर मचाता है। इसकी डेसिबल क्षमता 160 DB तक होती है। वहीं, मनुष्यों के लिए 50-60 DB तक की ध्वनि सुनने की क्षमता होती है। साउंड कैनन का इस्तेमाल भीड़ को काबू करने के लिए एक खास तरीके से किया जाता है। समुद्री डकैती से निपटने के लिए घेराबंदी की स्थितियों में बातचीत करने में यह डिवाइस काम आती है। वहीं, प्राकृतिक आपदाओं या अन्य आपात स्थितियों के दरम्यान दूर-दूर तक जानकारी देने के लिये इसका इस्तेमाल किया जाता है। नौ सेना सहित रक्षा बलों द्वारा भी इसका इस्तेमाल किया जाता रहा है।
कितना है घातक
साउंड कैनन से निकलने वाली तेज आवाज से चक्कर महसूस हो सकता है। असहज महसूस कर सकते हैं। बहुत देर तक यह अगर चालू रहा तो इसका असर सीधा सेहत पर पड़ता है। बीमार तक पड़ सकते हैं। कानों में चुभन जैसा दर्द हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, साल 2002 में इस डिवाइस की शुरुआत की गई थी। इसके बाद से उपकरण को कई कामों में इस्तेमाल किया जाने लगा। प्रारंभिक चेतावनी, बड़े पैमाने पर सूचना, भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा, सैन्य प्रयोग,वन्यजीव संरक्षण और समुद्री शिपिंग जैसे मौके पर इसका इस्तेमाल किया जाता है।
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