Hazaribagh : सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर और सुलभ इलाज उपलब्ध कराने के दावों के बीच हजारीबाग सदर अस्पताल से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। एक प्रसूता के परिजनों ने अस्पताल में कार्यरत एक कमांडो कर्मी पर बहला-फुसलाकर निजी नर्सिंग होम भेजने का इल्जाम लगाया है। परिजनों का कहना है कि निजी अस्पताल में ऑपरेशन के बाद प्रसूता की हालत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे आनन-फानन में आरोग्यम अस्पताल ले जाना पड़ा। वहां समय पर इलाज मिलने से उसकी जान बच सकी। यह मामला कटकमसांडी थाना क्षेत्र के शाहपुर गांव की रहने वाली 23 साल की करिश्मा कुमारी से जुड़ा है।
परिजनों के अनुसार, करिश्मा 21 तारीख को दोपहर करीब 12 बजे प्रसव के लिये हजारीबाग सदर अस्पताल पहुंची थीं। आरोप है कि अस्पताल परिसर में तैनात कमांडो कर्मी अजीत कुमार ने उन्हें सरकारी अस्पताल की व्यवस्था को लेकर आशंका जताई और बेहतर इलाज के नाम पर नवाबगंज स्थित एक निजी नर्सिंग होम जाने की सलाह दी। परिजनों का आरोप है कि उन्हें करीब 15 हजार रुपये में ऑपरेशन कराने की बात कही गई, जिसके बाद प्रसूता को उक्त निजी अस्पताल ले जाया गया।
ऑपरेशन के बाद बिगड़ी तबीयत
परिजनों के मुताबिक, निजी नर्सिंग होम में ऑपरेशन के बाद शुरुआती दो-तीन दिनों तक स्थिति सामान्य रही। लेकिन इसके बाद प्रसूता की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। गंभीर स्थिति को देखते हुये उसे तत्काल आरोग्यम अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकीय उपचार मिलने के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि संबंधित निजी नर्सिंग होम में पर्याप्त चिकित्सा संसाधन, विशेषज्ञ चिकित्सक और जरूरी सुविधाओं का अभाव था। परिजनों का यह भी आरोप है कि सरकारी अस्पताल से मरीजों को कथित तौर पर बेहतर सुविधा और कम खर्च का भरोसा देकर निजी संस्थानों में भेजा जाता है, जिससे मरीजों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती है। मामले को लेकर पीड़ित परिवार ने हजारीबाग के सिविल सर्जन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।






