Kohramlive : साल का वो दिन, जब हर पल शुभ होता है। न कोई मुहूर्त देखने की जरूरत, न किसी घड़ी की टोह। अक्षय तृतीया का पर्व एक ऐसा संयोग लेकर आता है, जब किये गये शुभ कार्यों का फल कभी खत्म नहीं होता। ‘अक्षय’ यानी जो कभी क्षय न हो — और यही दिन जीवन में अक्षय सुख, समृद्धि और सौभाग्य लाने वाला माना जाता है। अक्षय तृतीया इस साल 30 अप्रैल को मनाई जायेगी। यह तिथि हर वर्ष वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को आती है, और इसे अबूझ मुहूर्त कहा जाता है, यानी इस दिन कोई भी शुभ कार्य बिना पंचांग देखे किया जा सकता है।
सोने-चांदी की दुकानों पर तैयारी शुरू
रांची, जमशेदपुर, धनबाद से लेकर गढ़वा, गिरीडीह और पलामू तक — हर बाजार चमक रहा है। गहनों की दुकानों को सजाने-संवारने का काम जोरों पर है। लोगों को यकीन है कि अक्षय तृतीया पर खरीदी गई चीजें, घर में लक्ष्मी का वास लेकर आयेंगी।
क्यों खास है अक्षय तृतीया?
पौराणिक मान्यता है कि आज ही के दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। महाभारत काल में पांडवों को अक्षय पात्र इसी दिन प्राप्त हुआ था, जिससे कभी भोजन खत्म नहीं होता था। मान्यता है कि आज किया गया दान, पूजा और निवेश जीवनभर फलदायी होता है।
शुभ कार्यों की शुरुआत का उत्तम समय
चाहे नया व्यापार शुरू करना हो, गृह प्रवेश हो या कोई नया वाहन खरीदना, लोग आज के दिन को सबसे शुभ मानते हैं। मंदिरों में विशेष पूजा हो रही है, और घरों में मां लक्ष्मी के स्वागत की तैयारियां जोरों पर हैं।
स्वर्ण, लेकिन साथ में शुभ कर्म भी
पंडितों और आचार्यों के अनुसार, इस दिन अगर गरीबों को अन्न, जल, वस्त्र या गाय को चारा दिया जाए, तो उसका पुण्य कई गुना बढ़कर मिलता है। इसलिए इस बार की अक्षय तृतीया सिर्फ सोना खरीदने की नहीं, बल्कि दिल से देने की भी तारीख है।






