Khunti (Anil Mishra/Gaurav Kashyap) : रोती बिलखती यह मां आखिर कोसे तो किसे कोसे। उसका बच्चा जन्म लेने से पहले कोख में ही मर गया। रात में उसे प्रसव पीड़ा हुई थी। दर्द के मारे छटपटा रही इस प्रसुता की हालत देख हर कोई मन मसोस कर रह गया। कोई चारा नहीं था, बस खुद को लाचार और बेबश पाये। लोगों ने कहा, चाहकर भी घनघोर और अंधेरिया रात में कुछ नहीं कर सकते थे। गांव के बनई नदी में बाढ़ आ गया है। नदी पर कोई पुल नहीं। आने जाने का कोई इंतजाम नहीं। बहुत जरूरी होने पर जुगाड़ तंत्र जैसे डोली या खटिया के सहारे पानी लांघ जाना-ऊना होता है। अफसोस केवल इस बात का है कि आजाद भारत के जश्न में पूरा देश मग्न है, पर यहां एक मां रो रही है। उसका बच्चा दुनिया में आने से पहले ही मर गया।
सबसे हैरत की बात यह है कि यह गांव खूंटी शहर से कोसो दूर नहीं है। खूंटी के तोरपा प्रखंड के फटका पंचायत के फडिंगा गांव का है। इस गांव के कुछ लोग बताते हैं कि जब कभी चुनाव करीब आता है तो उन्हें यह भरोसा दिया जाता है कि इस बार बनई नदी पर पुल जरूर बन जायेगा। यह सुनते-सुनते जमाना गुजर गया, पर आजतक पुल नहीं बना। समाजसेवी दिलीप मिश्रा का कहना है कि कितना दुखद बात है कि आजाद भारत के जश्न में डूबे वतन में एक मां रो रही है। रात भर प्रसव पीड़ा में तड़पती रही। सुबह में जुगाड़ तंत्र मतलब डोली बनाकर अस्पताल तक लाया गया। करीब 3 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है। इस जुगाड़ तंत्र से प्रसुता हॉस्पिटल तो पहुंच गई, पर उसके कोख में ही बच्चा मर गया।
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