Ranchi : रांची की सोंधी हवा में आज एक नई उम्मीद घुली, कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास से निकली एक सधी हुई सांस ने 51 जिंदगियों को आजादी का रास्ता दिखा दिया। CM हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में झारखंड राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की 35वीं बैठक हुई, जहां जेल की ऊंची दीवारों के भीतर दबे इंसानी किस्सों को नये सिरे से सुना गया। एक-एक फाइल को जैसे पलट कर नहीं, पढ़ कर महसूस किया गया। दर्द, पछतावा, सुधरने की कोशिश और लंबी चुप्पियों के बीच से छनकर आये 103 मामलों में से 51 कैदियों की रिहाई पर सहमति बनी।
इनमें से कई वो हैं जिनकी उम्र अब ढलान पर है। जिन्होंने अपने जीवन के सबसे कीमती साल सलाखों के पीछे काट दिये, और अब जब जेल का आंगन भी छोटा लगने लगा है, तो राज्य सरकार ने उन्हें एक और मौका देने का साहसिक फैसला किया। बैठक में CM ने स्पष्ट किया कि “सिर्फ कानून की नजर से नहीं, मानवता की नजर से भी देखना होगा। जिन कैदियों ने 14 साल से अधिक सजा काटी, और जिनका आचरण जेल में अनुशासित रहा, उन्हें जिंदगी को फिर से जीने का अधिकार मिलना चाहिये।” CM ने ये भी कहा कि जिन कैदियों की मानसिक या शारीरिक हालत ठीक नहीं है, उनके लिये विशेष योजना बने। डॉक्टरों की सलाह के बाद ही रिहाई सुनिश्चित हो, ताकि वे बाहर आकर असहाय न हों, बल्कि अपने लिये एक बेहतर रास्ता बना सकें।
पुनः सामाजिक जुड़ाव भी है लक्ष्य
सरकार ने यह भी बताया कि 2019 से अब तक 619 कैदी रिहा हो चुके हैं, जिनमें से 470 को वृद्धावस्था पेंशन, राशन कार्ड, आवास योजना जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा गया है। बाकी को भी जल्द इस दायरे में लाया जायेगा। CM हेमंत सोरेन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कोई भी रिहा हुआ व्यक्ति समाज में उपेक्षित न रह जाये। जिंदगी की दूसरी पारी सम्मानजनक हो, यही सरकार की मंशा है।




