- हिंसक प्रदर्शनों के पीछे कट्टरपंथी इस्लामी संगठन ‘हिफाजत-ए-इस्लाम’ का हाथ
kohram live desk : इंडियन पीएम के बांग्लादेश दौरे के बाद वहां हिंसक विरोध प्रदर्शन का दौर शुरू हो गया। पुलिस से हिंसक झड़प में तकरीबन एक दर्जन लोगों की जान चली गई। प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश के पूर्वी जिले ब्राह्मणबरिया में ट्रेन, सरकारी दफ्तरों और कई मंदिरों को निशाना बनाया। हिंसक प्रदर्शनों के पीछे कट्टरपंथी इस्लामी संगठन ‘हिफाजत-ए-इस्लाम’ के हाथ होने की बात बताई जा रही है।

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अवामी लीग से 36 का आंकड़ा
‘हिफाजत-ए-इस्लाम’ कुछ वर्षों में मजबूत हुआ है और उसका बांग्लादेश में सियासी तौर पर दबदबा भी बढ़ा है। इसकी स्थापना 2010 में की गई थी। धर्मनिरपेक्षता की वकालत करने वाली बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग से इस संगठन का 36 का आंकड़ा रहा है। महिलाओं के अधिकारों को लेकर बिल हो या बांग्लादेश में धर्मनिरपेक्षता की बहाली को लेकर संविधान में संशोधन का मसला, हर मौके पर यह संगठन शेख हसीना की सरकार के फैसलों के विरोध में खड़ा नजर आता है।

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महिला बिल के खिलाफ किया था प्रदर्शन
‘हिफाजत-ए-इस्लाम’ का बांग्लादेश के चटगांव में हेडक्वार्टर है जिनका कौमी मदरसा, छात्रों और सुन्नी मौलवियों का बड़ा नेटवर्क है।2010 में हिफाजत-ए-इस्लाम ने महिला बिल के खिलाफ प्रदर्शन किया तो 2013 में अपनी 13 सूत्रीय मांगों को लेकर इसके समर्थक फिर ढाका की सड़कों पर उतर आए। उनकी मांगों में एक ईशनिंदा विरोधी कानून को लागू करना शामिल था जिसमें मौत की सजा का प्रावधान है। इन्होंने पारित हो चुके महिला बिल को रद्द करने की भी मांग की थी। उनकी मांग थी कि सार्वजनिक रूप से मर्दों और महिलाओं के मिलने पर रोक लगाई जाए और बांग्लादेश के अहमदिया समुदाय को “गैर-मुस्लिम” घोषित किया जाए जैसे कि पाकिस्तान में है।
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