Chouparan(Krishna Paswan) : चौपारण की दनुआ घाटी, एक ज़माना था जब इसे झारखंड की सुंदरियों में शुमार किया जाता था, घुमावदार पहाड़, हरियाली की बाहें और चुप्पी ओढ़े हुये रास्ते। मगर आज? अब इसे लोग ‘दानव घाटी’ कहते हैं –
जहां हर मोड़ पर एक हादसा सांसें रोक कर खड़ा रहता है, वहीं, अक्सर हर सुबह किसी की आख़िरी सुबह बन जाती है। आज सुबह घाटी की चुप्पी को चीरती दो गाड़ियों में जोरदार टक्कर हो गई। धुएं, तेल और चीखों का ऐसा विस्फोट हुआ की पूरा चौपारण कांप गया। गाड़ी के टुकड़े नहीं गिरे, मानो उम्मीदें बिखर गईं। गनीमत यह रही कि चालक और उपचालक दोनों सही-सलामत हैं, मगर जो लोगों ने देखा, वो रात भर सोने नहीं देगा। आनंद यादव, जो हर रोज़ चाय की दुकान चलाते हैं घाटी के मुहाने पर, बोले, भैया, जब भी कोई गाड़ी सीटी देती हुई यहां उतरती है, मेरी सांसें थम जाती हैं…न जाने आज किसकी बारी है।”
चौपारण के थानेदार अनुपम प्रकाश की आंखें भर आईं, बोले ये दनुआ घाटी नहीं, अब ‘दानव घाटी’ बन चुकी है। यहां सड़कें नहीं, खौफ की लकीरें हैं, जो हर बार खून से लाल होती हैं। अब ये घाटी नहीं, नरक का दरवाज़ा है। पांच हादसे एक महीने में? ये कोई इत्तिफाक नहीं, ये सिस्टम की नींद है।” वहीं, कुछ लोगों का कहना था कि अब ये घाटी सिर्फ एक सड़क नहीं, एक राज है, बेपरवाह सिस्टम, अधूरी परियोजनाएं और बेकसूर जिंदगियां। एक प्रत्यक्षदर्शी बोले, “एक पल में जिंदगी का रथ लुढ़क गया और घाटी में गूंजी सिर्फ एक चीख..‘बचाओ…’।
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