Ormanjhi(Kuldeep/Amitabh) : राजधानी रांची से सटे ओरमांझी के भगवान बिरसा जैविक उद्यान जो कुछ समय से शेरों की कमी से शांत सा था, वहां आज फिर से वनराज की वापसी हुई और वो भी किसी सजे-धजे बारात की तरह। छत्तीसगढ़ के नंदनवन चिड़ियाघर, रायपुर से दो रॉयल मेहमान ‘अभय’ एवं ‘शबरी’ लाये गये हैं। 14 साल के अभय नर शेर है, जिसके रौब से हवा भी ठिठक जाये। वहीं, 4 साल की मादा शेरनी शबरी, जिसके आने से जैसे उद्यान में फिर से बहार आ गई। केवल दहाड़ ही नहीं, अब तालाबों में भी हलचल बढ़ेगी, रायपुर से आये एक जोड़ा मगरमच्छ ने जैसे पानी को नया जीवन दे दिया है। इसके बदले ओरमांझी जू ने दो जोड़ा घड़ियाल, एक जोड़ा हिमालयन ब्लैक बियर और पांच जोड़ा साही दिये। कुछ महीने पहले तक इस उद्यान में शेरों की रौनक थी, जया, बिरू और प्रियंका जैसी शेरनियां थीं। पर जैसे-जैसे उम्र ने उन्हें थाम लिया, जंगल की दहाड़ भी धीरे-धीरे मौन हो गई। अब अकेला ‘शंशाक’ था, एक हाइब्रिड शेर जो खुद को अकेला महसूस करता था। दर्शकों की भीड़ तो आती थी, लेकिन बिना दहाड़ के लौट जाती थी। ‘अभय’ और ‘शबरी’ का आना सिर्फ वन्य जीवन का नहीं, दर्शकों की उम्मीदों का लौटना है। इस पूरे प्रयास में वन विभाग प्रधान मुख्य वन संरक्षक अशोक कुमार, वन्यप्राणी प्रतिपालक पारितोष उपाध्याय, उद्यान निदेशक जब्बर सिंह, वन्य चिकित्सक और सहायक वन संरक्षक सबने दिन-रात एक कर दिया। सुनें क्या बोले वन अधिकारी…








