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जुलाई के आखिरी हफ्ते में लौट सकता है मेघों का दौर…

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Kohramlive : आसमान पर छाये बादल जब बरसते नहीं, तो धरती की प्यास और लोगों की बेचैनी दोनों बढ़ जाती हैं। देश के कई हिस्सों में भारी बारिश के बाद अब मानसून कुछ कमजोर पड़ा है। उमस और गर्मी ने एक बार फिर लोगों को परेशान करना शुरू कर दिया है। लेकिन मौसम के नक्शे पर एक ऐसी हलचल दिखाई दे रही है, जिससे जल्द राहत की उम्मीद जगी है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, इंटरट्रॉपिकल कन्वरजेंस जोन (ITCZ) एक बार फिर सक्रिय हो रहा है। यह विशाल मौसमी क्षेत्र बंगाल की खाड़ी से लेकर मध्य प्रशांत महासागर तक करीब 7000 से 10000 किलोमीटर तक फैला हुआ है। इसके भीतर कई ट्रॉपिकल सिस्टम बन रहे हैं, जो धीरे-धीरे भारत की ओर बढ़ सकते हैं। अगर इनमें से कोई सिस्टम मजबूत होकर देश के करीब पहुंचता है, तो जुलाई के आखिरी सप्ताह में मानसून फिर रफ्तार पकड़ सकता है।

क्या है ITCZ, जो बदल सकता है मौसम का मिजाज?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इंटरट्रॉपिकल कन्वरजेंस जोन धरती के भूमध्य रेखीय क्षेत्र के आसपास बनने वाला एक ऐसा इलाका है, जहां अलग-अलग दिशाओं से आने वाली हवायें आपस में मिलती हैं। इस क्षेत्र में उत्तर और दक्षिण दिशा की ट्रेड विंड्स टकराती हैं। गर्म और नम हवा ऊपर उठती है। बादलों का निर्माण होता है। भारी बारिश की परिस्थितियां बनती हैं। आमतौर पर मानसून के दौरान ITCZ भारत के ऊपर की ओर खिसकता है, जिससे दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवाओं को ताकत मिलती है। लेकिन इस बार यह सामान्य स्थिति से कुछ अलग होकर पूर्वी हिस्से में सक्रिय है।

भारत की ओर बढ़ रहे कई ट्रॉपिकल सिस्टम

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस बड़े मौसमी क्षेत्र के अंदर कई कम दबाव वाले सिस्टम और उष्णकटिबंधीय तरंगें सक्रिय हैं। इनका रुख फिलहाल उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर है। यदि इनमें से कोई सिस्टम बंगाल की खाड़ी तक पहुंचकर मजबूत होता है, तो यह मानसून ट्रफ लाइन को सक्रिय कर सकता है। इसका असर देश के कई हिस्सों में देखने को मिल सकता है।

इन राज्यों में लौट सकती है बारिश

यदि मौसम की यह गतिविधि अनुकूल रही तो बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत कई राज्यों में बारिश का दौर फिर शुरू हो सकता है। मौसम मॉडल और विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार, सक्रिय हो रहे ट्रॉपिकल सिस्टम 20 से 30 जुलाई के बीच भारतीय उपमहाद्वीप को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि ये सिस्टम कितने मजबूत होंगे और कितनी बारिश करायेंगे। अगर कोई सिस्टम बहुत ज्यादा ताकतवर हुआ, तो भारी बारिश, बाढ़, तेज हवायें, तूफानी गतिविधियां जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं।इसी वजह से मौसम विशेषज्ञ लगातार इस सिस्टम पर नजर बनाये हुये हैं।

मानसून की चाबी ITCZ के हाथ में

भारतीय मानसून काफी हद तक ITCZ की स्थिति पर निर्भर करता है। जब यह उत्तर की ओर बढ़ता है, तो दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवाएं मजबूत होकर भारत में प्रवेश करती हैं।इस बार ITCZ के पूर्वी हिस्से में ज्यादा सक्रिय रहने से मानसून की चाल प्रभावित हुई है। अगर यह पश्चिम की ओर खिसकता है, तो मानसून ट्रफ मजबूत हो सकती है और बारिश का सिलसिला फिर तेज हो सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम प्रणालियों के व्यवहार में बदलाव देखने को मिल रहा है। ITCZ कभी सामान्य से ज्यादा उत्तर तो कभी दक्षिण की ओर खिसक रहा है।

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