UP : उसे एक पल की नफरत ने निगल लिया, रोहतक के गांव काहनी की मिट्टी आज भीगी हुई है, आंसुओं से, खून से और उस दर्द से जो किसी प्रेम कथा का अंत नहीं, बल्कि उसकी चीख है। गांव की चौपालों में लोग अब भी फुसफुसा कर कहते हैं, “इतना निर्मम कौन हो सकता है, अपनी ही बहन के साथ?” बरसों की जद्दोजहद, कोर्ट मैरिज, फिर छोटा-सा घर और दो साल का देव उनके संसार की धड़कन थी। सूरज और सपना की कहानी किताबों जैसी नहीं थी, वह खुरदरी थी, संघर्षों से भरी हुई, लेकिन सच्ची थी। आठवीं में शुरू हुआ प्यार, समाज की दीवारों से टकराता रहा। शिकायतें, रोक-टोक, रिश्तेदारों की कटाक्ष, सब झेलकर दोनों ने कोर्ट मैरिज की। सपना अक्सर अपनी सास के सीने से लगकर कहती थी, “मम्मी, मुझे यहीं रहने दीजिये, घर जाऊंगी तो मार देंगे।”
CCTV में कैद मौत
रात 9.40 बजे का वक़्त, गांव शांत था, लेकिन चार परछाइयां मौत बनकर सूरज के घर की ओर बढ़ रही थीं। CCTV में साफ दिख रहा है, सपना का भाई संजू और उसके तीन साथी। दरवाजा तोड़ते ही संजू ने देसी पिस्तौल तान दी, पहली गोली, सीधे सपना की छाती में लगी। वह चीख भी न पाई। दूसरी गोली उसे बचाने दौड़े देवर साहिल के पेट में धंस गई।
साहिल गिर पड़ा, घर चीखों से भर गया और संजू भाग निकला। साहिल तीन घंटे की लड़ाई के बाद बच गया। सपना को PGI ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर सिर्फ सिर हिलाते रहे। सूरज की दुनिया, उसका सपना, उसकी पत्नी, सबकुछ एक झटके में खत्म हो चुका था। साहिल की सर्जरी तीन घंटे चली, डॉक्टरों ने उसे बचा लिया, लेकिन उसकी आवाज अब भी दर्द से कांपती है। वहीं, सूरज की मां की चीख केवल इतना ही पूछती है, अपनी ही मां के गर्भ से जन्मा भाई ऐसा कैसे कर सकता है? निर्मला देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस सुरक्षा में सपना की अर्थी निकली। सूरज ने कांपते हाथों से अपनी पत्नी को मुखाग्नि दी तो पूरा गांव सिसक उठा।






