UP : कभी खेतों की पगडंडियों पर बेखौफ कदम बढ़ाने वाले ग्रामीण, अब शाम ढलते ही अपने घरों में दुबकने को मजबूर थे। जंगल और खेत के बीच छिपा एक खौफ गांव की रातों की नींद उड़ा रहा था। शेरपुर पट्टी में करीब एक महीने से एक्टिव तेंदुआ आखिरकार वन विभाग के लगाये पिंजरे में कैद हो गया। शनिवार शाम पिंजरे में बांधी गई बकरी के लालच में आया तेंदुआ रात में पिंजरे में फंस गया। सुबह जब गांव में यह खबर फैली तो तेंदुए को देखने के लिये लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। किसी के चेहरे पर डर था तो किसी की आंखों में राहत।
कुत्तों से लेकर गोवंश तक, गांव में मचा रखा था आतंक
ग्रामीणों के मुताबिक यह तेंदुआ लंबे समय से गांव के आसपास मंडरा रहा था। रात के अंधेरे में वह गांव में घुस आता और कई कुत्तों को उठाकर ले जाता। इतना ही नहीं, पशुशाला में घुसकर वह तीन गोवंश का भी शिकार कर चुका था। तेंदुए की मौजूदगी ने ग्रामीणों की जिंदगी मुश्किल कर दी थी। खेतों में काम करने जाने से लोग डरने लगे थे। रात में पशुओं की रखवाली के लिये ग्रामीण जागते रहते थे। खेती का काम तक प्रभावित होने लगा था। वन विभाग के रेंजर रवि कुमार गंगवार ने मीडिया को बताया कि ग्रामीणों की मांग पर दो दिन पहले शेरपुर पट्टी में पिंजरा लगाया गया था। शनिवार शाम उसमें बकरी बांधी गई। तेंदुआ शिकार की तलाश में पिंजरे तक पहुंचा और उसमें कैद हो गया। रेंजर ने बताया कि पकड़ा गया तेंदुआ करीब एक साल का है। मेडिकल परीक्षण के लिये उसे मुरादाबाद के डियर पार्क भेजा गया है। वन विभाग के अनुसार शेरपुर पट्टी में पकड़ा गया तेंदुआ ठाकुरद्वारा क्षेत्र में 15वां है। वहीं पूरे मुरादाबाद जिले में अब तक 20 तेंदुए पकड़े जा चुके हैं। तेंदुओं की लगातार मौजूदगी को देखते हुये पूरे ठाकुरद्वारा तहसील क्षेत्र में 41 पिंजरे लगाये गये हैं। इनमें रोजाना बकरी आदि बांधकर तेंदुओं को पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
भरतपुर में भी पिंजरे में फंसा दूसरा तेंदुआ
उधर, कांठ तहसील के भरतपुर गांव में भी वन विभाग को बड़ी सफलता मिली है। शनिवार तड़के करीब 10 दिन से लगाये गये पिंजरे में एक और तेंदुआ कैद हो गया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और तेंदुए को सुरक्षित रेस्क्यू कर डियर पार्क, मुरादाबाद भेज दिया। दरअसल, 15 सितंबर को भरतपुर निवासी निर्वेश देवी खेत में घास काट रही थीं। इसी दौरान गन्ने के खेत में छिपे तेंदुए ने उन पर हमला कर दिया था। हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। इसके बाद वन विभाग ने गांव में दो पिंजरे लगाये और टीम ने तीन दिन तक कैंप किया। 17 सितंबर को पहले पिंजरे में एक मादा तेंदुआ कैद हुआ था। इलाके में एक और तेंदुए की आशंका को देखते हुये दूसरा पिंजरा लगा रहने दिया गया। आखिरकार शनिवार तड़के उसमें भी तेंदुआ कैद हो गया।





