Delhi : दिल्ली की अदालत में जब कानून ने फैसला सुनाया, तो एक स्त्री ने सुकून की सांस ली, लेकिन कोलकाता की गलियों में एक पिता का दिल फिर भर आया। ये कहानी है मोहम्मद शमी की मैदान का योद्धा, दिल का बेबस पिता। वो शख्स जिसने 2023 के वर्ल्ड कप में हिंदुस्तान को जश्न का मौका दिया था, आज अपनी बेटी आयशा की एक तस्वीर पर आंखें नम कर बैठा।
“ईश्वर तुझे खुश रखे मेरी जान…”
इंस्टाग्राम की एक पोस्ट में बसी थी एक बाप की टूटी हुई दुनिया। शमी ने लिखा, “प्यारी बेटी, मुझे आज भी वो सारी रातें याद हैं जब हम जागते रहे, बातें करते रहे, हंसते रहे…” उस तस्वीर में हंसी थी, पर पीछे छिपे दर्द को केवल वही समझ सकता है जिससे उसकी औलाद छीन ली गई हो। जब कोलकाता हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि शमी को हर महीने ₹4 लाख गुजारा भत्ता देना होगा, तो हसीन जहां मुस्कुराई,” भगवान का शुक्र है कि देश में कानून है…”मगर उस पल एक पिता के हाथों से, शायद फिर बेटी की उंगली छूट गई।
2014 से 2024 — प्यार, आरोप और दूरी
2014 में बनी जोड़ी, 2015 में आयशा की किलकारी गूंजी। 2018 में एक तूफ़ान आया, घरेलू हिंसा, दहेज, बेवफाई के आरोपों में उलझी मोहब्बत और अब बेटी सिर्फ तस्वीरों में मिलती है। शमी मैदान पर भले किसी को क्लीन बोल्ड कर दें, लेकिन बेटी के सामने वो बस एक बेबस इंसान हैं जो सिर्फ दुआ कर सकता है और एक पोस्ट में अपना प्यार उडेल सकता है।
शमी की पोस्ट ने क्या बताया?
बेटी से बिछुड़ा एक बाप जब उसके जन्मदिन पर दुनिया को अपना दिल दिखाता है, तो ये सिर्फ एक पोस्ट नहीं होता ये एक पिता की गवाही होती है, जो अदालत के बाहर, सोशल मीडिया की अदालत में दर्ज होती है। और हां… मोहब्बत जब बाप-बेटी के रिश्ते में हो, तो वो कभी भी खत्म नहीं होती, भले ही कोर्ट, कस्टडी या दूरी आ जाये। “मोहब्बतें न अदालत की मोहताज होती हैं, न तारीखों की वो तो तस्वीरों में भी जिंदा रहती हैं।”




