spot_img

गढ़वा में सजा न्याय का मेला, जज बोले…

Date:

spot_img
spot_img
Garhwa(Nityanand Dubey) : गढ़वा व्यवहार न्यायालय परिसर का आज नजारा कुछ अलग था। कहीं लोग अपने विवाद का समाधान कराने पहुंचे थे तो कहीं सरकारी योजनाओं की जानकारी लेने के लिये भीड़ लगी थी। एक ही परिसर में न्याय, अधिकार और जनकल्याण का ऐसा संगम दिखा कि लोक अदालत किसी अदालत से ज्यादा जागरूकता के बड़े मंच की तस्वीर पेश कर रही थी। मौका था राष्ट्रीय लोक अदालत का। झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने इसका उद्घाटन किया। इस दौरान कई लाभुकों के बीच चल-अचल परिसंपत्तियों का वितरण भी किया गया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार (नालसा), नई दिल्ली और झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), गढ़वा के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में न्यायपालिका, प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

आदिवासी परंपरा से हुआ न्यायमूर्ति का स्वागत

कार्यक्रम स्थल पर न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव के पहुंचते ही उनका स्वागत स्थानीय आदिवासी परंपरा के अनुसार लोटा-पानी और पारंपरिक गीतों के साथ किया गया। मंच पर कार्यक्रम की शुरुआत भी खास अंदाज में हुई। न्यायमूर्ति के निर्देश पर पांच लाभुक महिलाओं ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। स्थानीय न्यायिक पदाधिकारियों ने अतिथियों का बुके, पौधा और स्मृति चिह्न देकर स्वागत किया।

‘जानकारी नहीं होगी तो योजनाओं का लाभ कैसे मिलेगा?’

कार्यक्रम को संबोधित करते हुये न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि गढ़वा न्यायपालिका की ओर से राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन गर्व की बात है। उन्होंने साफ कहा कि सिर्फ अपने अधिकारों को जान लेना काफी नहीं है। जब तक सरकारी योजनाओं और अधिकारों का लाभ धरातल पर लोगों तक नहीं पहुंचेगा, तब तक जागरूकता का उद्देश्य पूरा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सरकार के पास जनता के लिये कई योजनाएं हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में योजनाओं की 70 प्रतिशत तक राशि वापस लौट जाती है। न्यायमूर्ति ने लोगों से सजग और जागरूक बनने की अपील करते हुये कहा कि उन्हें अपने अधिकारों के साथ-साथ सरकारी योजनाओं की जानकारी भी रखनी चाहिये। उन्होंने छोटे-मोटे विवादों को विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से सुलझाने की अपील की। उनका कहना था कि न्याय चाहे सामाजिक हो या कानूनी, उसका लोगों तक पहुंचना जरूरी है। लोक अदालत में जुटी भीड़ को उन्होंने जिले के लोगों की जागरूकता का संकेत बताया।

मुकदमे नहीं, सुलह से समाधान, बचेगा समय और पैसा

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डालसा अध्यक्ष मनोज प्रसाद ने लोक अदालत के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुये कहा कि इसका मकसद लोगों को त्वरित, सस्ता और सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि लंबे मुकदमे, कानूनी खर्च और अदालतों में होने वाली देरी आम लोगों के लिये परेशानी का कारण बनती है। ऐसे में लोक अदालत विवादों के समाधान का प्रभावी माध्यम है। लोक अदालत में सुलहनीय आपराधिक मामलों के अलावा चेक बाउंस से जुड़े मामले, मोटर दुर्घटना दावा, वैवाहिक एवं पारिवारिक विवाद, बिजली-पानी, उत्पाद, श्रम विवाद, भूमि अधिग्रहण, सिविल वसूली, बैंक, वन अधिनियम, बीएसएनएल समेत अन्य सुलहनीय मामलों का निस्तारण किया जा सकता है। खास बात यह है कि मुकदमेबाजी से पहले के मामलों को भी लोक अदालत में लाया जा सकता है।

कोर्ट फीस भी नहीं, पुराने मामलों में पैसा वापस

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने बताया कि लोक अदालत में मामलों के निस्तारण के लिये कोई कोर्ट फीस नहीं लगती। वहीं, यदि किसी लंबित मामले का लोक अदालत में निस्तारण होता है तो पहले जमा की गई कोर्ट फीस वापस किये जाने का भी प्रावधान है। उन्होंने वादी और प्रतिवादियों से लोक अदालत का लाभ उठाकर समय और धन दोनों बचाने की अपील की। कार्यक्रम स्थल पर जिले के विभिन्न सरकारी विभागों की ओर से स्टॉल लगाये गये थे। यहां लोगों को जनकल्याणकारी योजनाओं की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और मिलने वाले लाभ की जानकारी दी गई। कई लाभुकों के बीच चल-अचल परिसंपत्तियों का वितरण भी किया गया। गढ़वा के DC पशुपतिनाथ मिश्रा ने कहा कि जिले के विभिन्न विभागों के माध्यम से अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। पात्र लोगों तक इन योजनाओं का लाभ पहुंचना जरूरी है। उन्होंने आम नागरिकों से जागरूक होकर सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की। DC ने कहा कि जिला प्रशासन की जनसुनवाई में कई समस्याओं का समाधान किया जाता है, लेकिन कुछ मामलों में जिला विधिक सेवा प्राधिकार की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। डालसा लोगों को उनके हक, अधिकार और न्याय तक पहुंच दिलाने में अहम भूमिका निभा रहा है। राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य भी यही है कि लोगों को आपसी सहमति और मध्यस्थता के जरिए कम समय और कम खर्च में न्याय मिल सके तथा अदालतों पर मुकदमों का बोझ भी कम हो। वहीं, पुलिस कप्तान आशुतोष शेखर ने कहा कि लोक अदालत में मामलों की सुनवाई निःशुल्क होती है। इससे लोगों के समय और धन दोनों की बचत होती है। उन्होंने बताया कि अदालतों में लंबित मामलों के अलावा प्री-लिटिगेशन यानी मुकदमा शुरू होने से पहले के मामलों को भी लोक अदालत में लाया जा सकता है।

इसे भी पढ़ें :

रांची में इस अस्पताल का लाइसेंस रद्द…

Ranchi :  राजधानी रांची के रिंग रोड स्थित ट्यूलिप...

रांची में आज 12 घंटे पानी का संकट…

Ranchi : राजधानी रांची में आज यानी रविवार को...

गढ़वा में एक ही रोज में 1.41 लाख मामलों का निपटारा…

Garhwa(Nityanand Dubey) : न्याय के लिये लंबी तारीखों का...

BRICS डिनर में विदेशी मेहमानों की थाली में उतरी देश की शाही रसोई…

New Delhi : नई दिल्ली के भारत मंडपम की...

अमित शाह से मिले डॉ. प्रदीप वर्मा, बोले…

Ranchi : दिल्ली में शनिवार को भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री...

Advertisement

spot_img
spot_img
spot_img

Related articles:

रांची में इस अस्पताल का लाइसेंस रद्द…

Ranchi :  राजधानी रांची के रिंग रोड स्थित ट्यूलिप...

रांची में आज 12 घंटे पानी का संकट…

Ranchi : राजधानी रांची में आज यानी रविवार को...

गढ़वा में एक ही रोज में 1.41 लाख मामलों का निपटारा…

Garhwa(Nityanand Dubey) : न्याय के लिये लंबी तारीखों का...

BRICS डिनर में विदेशी मेहमानों की थाली में उतरी देश की शाही रसोई…

New Delhi : नई दिल्ली के भारत मंडपम की...

अमित शाह से मिले डॉ. प्रदीप वर्मा, बोले…

Ranchi : दिल्ली में शनिवार को भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री...