Bihar : बिहार में नई NDA सरकार के गठन के बाद शपथ ग्रहण समारोह की सबसे बड़ी चर्चा का केंद्र बने एक ऐसे चेहरे, जिनसे कोई खास उम्मीद नहीं थी—दीपक प्रकाश। उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक ने बिना चुनाव लड़े ही मंत्री पद की शपथ ले ली, और इस कदम ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी।
दीपक का मंत्री बनना, खासकर युवा पीढ़ी के प्रतिनिधि के रूप में, एक बड़ा संदेश था। जींस और सफेद शर्ट में उनका आगमन यह दिखाता था कि वे पारंपरिक राजनीति से हटकर कुछ नया लेकर आ रहे हैं।हालांकि, राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहे हैं कि कुशवाहा ने अपनी पत्नी स्नेहलता को जीत दिलवाने के बजाय अपने बेटे को मंत्री क्यों बनाया।

रालोमो को छह सीटें मिलीं, लेकिन यह कदम कई राजनीतिक विश्लेषकों के लिए चौंकाने वाला था। दीपक के सामने अब एक बड़ी चुनौती यह है कि आगे छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना होगा, वरना उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ेगा। यह पूरी स्थिति बिहार में वंशवाद और युवा नेतृत्व की बहस को एक बार फिर तूल दे रही है। आने वाले दिनों में यह कदम राजनीति के नए मोड़ की शुरुआत हो सकता है।














