Ranchi : गरीबों के हक का अनाज गलत तरीके से लेने वालों के खिलाफ झारखंड सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य में 6.29 लाख से अधिक अपात्र राशन कार्डधारियों की पहचान की गई है और अब उनके राशन कार्ड रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने “राइटफुल टारगेटिंग” योजना के तहत झारखंड के 6,29,973 अपात्र लाभुकों को चिह्नित करते हुये तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिये हैं।
31 अगस्त तक नाम नहीं हटे तो रुक सकता है अनाज कोटा
केंद्र सरकार ने राज्य को साफ चेतावनी दी है कि अगर तय समय सीमा तक अपात्र लोगों के नाम राशन सूची से नहीं हटाये गये, तो उसी अनुपात में राज्य का खाद्यान्न आवंटन यानी अनाज कोटा कम किया जा सकता है। इसके बाद झारखंड खाद्य आपूर्ति विभाग के सचिव ने सभी जिलों के उपायुक्तों को निर्देश जारी कर दिये हैं। सभी जिलों को 25 अगस्त तक चिन्हित अपात्र लाभुकों के राशन कार्ड रद्द करने की कार्रवाई पूरी करने को कहा गया है।
सूची में सरकारी कर्मचारी से लेकर कारोबारियों तक के नाम
जांच रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले मामले सामने आये हैं। केंद्र की ओर से तैयार सूची में ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद गरीब कल्याण योजनाओं का लाभ उठा रहे थे। सूची में 1,272 सरकारी कर्मचारी, जो नौकरी में रहते हुये राशन का लाभ ले रहे थे। 1,84,810 आयकरदाता, जिन्होंने राशन कार्ड के जरिये अनाज लिया। 15,493 बड़े कारोबारी, जिनका ग्रॉस टर्नओवर अधिक है। 13,087 कंपनियों के मालिक। 21,442 चारपहिया वाहन मालिक शामिल हैं। वहीं, डुप्लीकेट कार्ड और लंबे समय से राशन नहीं लेने वालों पर भी कार्रवाई की गई है। जांच के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे कार्डधारी भी मिले हैं, जिनके नाम हटाने के निर्देश दिये गये हैं। इनमें 1,10,142 डुप्लीकेट राशन कार्डधारी एवं 1,77,751 ऐसे लाभुक, जिन्होंने पिछले छह महीनों से लगातार राशन नहीं उठाया, शामिल हैं। सरकार का कहना है कि राशन व्यवस्था का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न पहुंचाना है। ऐसे में अपात्र लोगों को हटाकर वास्तविक गरीब और जरूरतमंद लाभुकों को योजना का लाभ दिलाना प्राथमिकता है।















