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52 साल का इश्क, 20 साल की जान और कुएं में दफन मोहब्बत…

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Kohramlive (Neeraj Thakur) : गांव बिजवारी की सुबहें अब पहले जैसी नहीं रहीं… चौपाल पर बैठा हर बुजुर्ग चुप है, और मांओं की आंखों में अनकही दहशत है। वजह है – गुड़िया। महज 20 साल की गुड़िया करीब तीन साल पहले ब्याही गई थी भूदेव से। छांव की तरह सीधी-सादी, लेकिन उसकी आंखों में बगावत की वो चिंगारी थी, जो उसकी उम्र से नहीं, उसके हालात से जन्मी थी। 24 अप्रैल को उसने सबकुछ छोड़ दिया, ससुराल, मायका, दुनिया। वो चली गई थी उस शख्स के साथ, जो उसका प्यार नहीं, उसकी मौत बन गया। विनोद, 52 साल का अधेड़, जो उसके जीजा का दोस्त था और किसी और का पति भी। गांव में कोई नहीं जानता था कि विनोद के साथ बिताये हर पल में गुड़िया एक नई जिंदगी पाल रही थी, वो तीन माह की गर्भवती थी। लेकिन तीन दिन बाद उसकी लाश मिली कुएं में, वही कुआं, जो अब सिर्फ पानी नहीं, एक प्यासी आत्मा का इतिहास भी समेटे है। 26 अप्रैल को गुड़िया की एक झलक मिली, CCTV कैमरे में, विनोद के पीछे बैठी बाइक पर। मायके से आई चीखें थाने तक पहुंचीं, और ससुराल की चुप्पी में एक गूंगी शिकायत छिपी थी। परिवार ने कहा, विनोद बहला-फुसलाकर ले गया, लेकिन सच्चाई इससे भी ज्यादा स्याह थी।

गुड़िया मरी नहीं थी – मारी गई थी। उसके साथ मरा वो बच्चा, जिसे उसने तीन महीने से अपनी कोख में पाला था। वो सिर्फ पत्नी नहीं थी, प्रेमिका नहीं थी, वो मां भी थी। पिता वीरेंद्र सिंह की आंखें जब पोस्टमार्टम हाउस में पड़ी लाश पर गईं, तो रोते नहीं थे, कांपते थे। उनके भीतर कुछ टूट गया था, कुछ हमेशा के लिये मर गया था। विनोद ने सिर्फ हत्या नहीं की – उसने गुनाह को छुपाने के लिये एक और साजिश की। कुएं के पास तीन गांव वालों की फोटो फेंक दी, ताकि पुलिस भ्रम में रहे, और वो बच निकले। पर किस्मत की दीवारें जब गिरती हैं, तो शातिर दिमाग भी दब जाते हैं। पुलिस ने एक-एक तस्वीर की सच्चाई निकाली, कोई रेलवे कर्मचारी निकला, कोई मानसिक रूप से अस्वस्थ। विनोद पकड़ा गया। अब वो चुप है। और पुलिस पूछ रही है – गुड़िया को क्यों मारा?

मैं उसकी पत्नी हूं, सरला की चुप्पी टूटी

मथुरा के बरसाना की वीरान दोपहर में जब पुलिस की जीप लौटी, एक औरत थाने के बरामदे में बैठी थी, सिर पर पल्लू, आंखों में थकान और होठों पर ऐसी सिहरन जो सिर्फ एक पत्नी के विश्वासघात से ही आती है। वो थी 48 साल की सरला देवी यानी विनोद की पत्नी। “हां, मैं विनोद की पत्नी हूं…”, सरला ने हौले से कहा, “पर पिछले पांच सालों से वो सिर्फ नाम का पति था। उसका मन कहीं और भटक चुका था, पहले शराब में, फिर औरतों में, और आखिर में… गुड़िया में।” सरला बताती हैं कि तीन महीने पहले की बात है। “गुड़िया पहली बार विनोद के साथ घर आई थी, बहन बताकर। पर उसके हावभाव… उसकी आंखें… वो बहन नहीं थी।” सरला ने विनोद से सवाल किया, तो जवाब मिला, “घर में मेहमान है, इज्जत कर।”

पड़ोसियों के ताने बढ़े, और विनोद की बेरुखी भी। “उसने मुझसे बात बंद कर दी थी। रात-रात भर बाहर रहता। कुछ हफ्ते पहले विनोद के मोबाइल पर एक मैसेज देखा, ‘हमारा बच्चा अब तीन महीने का है।’ सरला का दिल बैठ गया। मैंने उससे पूछा तो उसने मुझे धक्का देकर कमरे से निकाल दिया। उसी दिन मैंने ठान लिया कि ये रिश्ता अब सिर्फ कानून में है, दिल में नहीं। जब पुलिस ने बताया कि जैंत के चौमुहां स्थित आम्रपाली के सामने के कुएं में एक औरत की लाश मिली है और शक विनोद पर है, मेरा कलेजा कांप गया। सरला थरथराती आवाज में कहती है, “मैंने तो सिर्फ एक बेवफा पति खोया, लेकिन उस लड़की ने अपनी जान दी, अपने बच्चे की जान दी…!” पुलिस ने जब सरला से विनोद की गतिविधियों के बारे में पूछा, तो उन्होंने खुलकर बताया, विनोद अक्सर जैंत के पास के फार्महाउस में छिपकर मिलता था। उसके पास दो मोबाइल थे, एक घर के लिये, एक ‘गुड़िया’ के लिये। घटना वाले दिन सुबह 5 बजे ही बिना बताये निकल गया था। यह थी विनोद की पत्नी सरला की गवाही, वो गवाही जो किसी अदालत में नहीं, एक टूटे दिल की दरारों में दर्ज हुई है।

साजिश के साये में जीजा 

बरसाना की धूलभरी पगडंडी पर जब गुड़िया ने अपने घर की देहरी पार की थी, तो किसी को नहीं मालूम था कि वह लौटेगी… तो बस एक लाश बनकर। लेकिन इस दास्तान का सबसे खामोश किरदार अब सामने आ रहा है – रामकिशन, गुड़िया का जीजा, और उस 52 वर्षीय विनोद का खास दोस्त, जिसके साथ गुड़िया की जान गई। पुलिस की शुरुआती तफ्तीश में जो बात छुपी रही, वो एक पुराने मोबाइल से निकली, गुड़िया के लापता होने से एक दिन पहले, रामकिशन ने उसे विनोद से मिलने के लिए बाइक भेजी थी। गुड़िया के मायकेवालों को शक है कि ये मुलाकात अचानक नहीं थी, बल्कि एक साजिश का हिस्सा थी। क्या रामकिशन जानता था कि विनोद पहले से शादीशुदा है? क्या उसने गुड़िया को जानबूझकर उस दलदल में धकेला जहां से वापसी नामुमकिन थी? पुलिस की रिपोर्ट कहती है, रामकिशन ने अब तक सिर्फ इतना कहा कि “मैंने कुछ नहीं किया…”मगर सवाल ये है कि –क्या चुप रह जाना, सच्चाई छिपाने जितना ही अपराध नहीं होता? सूत्रों की मानें तो विनोद की पत्नी ने भी एक अहम बात पुलिस को बताई है, “रामकिशन अकसर हमारे घर आता था… और कई बार विनोद और गुड़िया को अकेले छोड़ देता था।” यानी, रिश्तों की दीवारों में दरार पहले से थी, मगर किसी ने आवाज नहीं उठाई। अब पुलिस रामकिशन के कॉल डिटेल, CCTV और पिछले तीन महीनों की गतिविधियों की जांच कर रही है। क्या वह केवल एक मूक गवाह था… या इस खौफनाक मोहब्बत का साजिशकर्ता? सीओ गोवर्धन आलोक सिंह की बातों में दर्द नहीं, कठोर तथ्य थे, विनोद गुड़िया को नहीं रखना चाहता था। क्योंकि वो पहले से शादीशुदा था। एक और रिश्ता उसकी जिंदगी के हिसाब से भारी था। तो उसने चुना मौत का रास्ता।

नोटः यह खबर मीडिया में आई खबरों के आधार पर बनाई गई है।

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