Garhwa(Nityanand Dubey) : जिला विधिक सेवा प्राधिकार, गढ़वा द्वारा संचालित 90 दिवसीय विशेष मध्यस्थता शिविर में विभिन्न न्यायालयों में वर्षों से लंबित पारिवारिक मामलों का सफलतापूर्वक समाधान किया गया। शिविर के तहत आपसी सहमति से 07 मामलों का निपटारा किया गया, जिनमें से कई में पक्षकारों के बीच तीन-तीन व चार-चार वाद लम्बित थे।
एक मध्यस्थता प्रक्रिया में चार मुकदमों का समाधान
छोटू कुमार गुप्ता एवं उनकी पत्नी सोनी देवी के बीच 498A, भरण-पोषण, चोरी तथा पत्नी को विदा कराने संबंधी चार मामले वर्षों से लंबित थे। MCPC (उच्चतम न्यायालय से प्रशिक्षित) मध्यस्थ राकेश कुमार त्रिपाठी के सकारात्मक प्रयासों से दंपत्ति में सुलह हो गई और छोटू कुमार गुप्ता ने अपनी पत्नी को मान-सम्मान के साथ रखने पर सहमति जताई। इस प्रकार एक ही मध्यस्थता में चार मामलों का समाधान हुआ।
एकमुश्त भरण-पोषण व उपहार की वापसी पर सहमति
एक अन्य मामले में अजीत कुमार राम और उनकी पत्नी रानी देवी के बीच भी चार मुकदमे लम्बित थे। मध्यस्थ राकेश त्रिपाठी के प्रयासों से इन मामलों में भी सहमति बनी। हालांकि, पत्नी ने साथ रहने से इनकार किया लेकिन एकमुश्त भरण-पोषण राशि और शादी में मिले उपहारों की वापसी पर दोनों पक्षों ने सहमति दी।
न्यायिक मार्गदर्शन और सहयोग
यह अभियान सुप्रीम कोर्ट, झारखंड हाई कोर्ट, रांची तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार, गढ़वा के संयुक्त मार्गदर्शन में संचालित हो रहा है। इसमें प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार, कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश कौशल किशोर झा, एवं प्राधिकार की सचिव निभा रंजना लकड़ा का विशेष मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है। इस शिविर को सफल बनाने में मध्यस्थों, जिला अधिवक्ता संघ, पक्षकारों एवं PLV (पैरा लीगल वॉलेंटियर) की सक्रिय भूमिका रही।
दिव्यांग बच्चों की पहचान हेतु विशेष अभियान
जिला विधिक सेवा प्राधिकार, गढ़वा की सचिव निभा रंजन लकड़ा ने जानकारी दी कि झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार, 6 जुलाई से 20 जुलाई 2025 तक गढ़वा जिले में दिव्यांग बच्चों की पहचान हेतु विशेष अभियान चलाया जायेगा। इस अभियान में सभी पंचायत मुख्यालयों पर शिविर लगाए जायेंगे। दिव्यांग बच्चों की पहचान, दिव्यांगता प्रमाण पत्र का निर्माण, उपकरण वितरण,स्वास्थ्य सेवाएं और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की प्रक्रिया चलाई जायेगी। इसका लक्ष्य दिव्यांग बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ना, उन्हें वंचना से बचाना और सशक्त बनाना है।












