Kohramlive : धरती लाल है, मिट्टी में बारूद की गंध है और हर पत्ता किसी खामोश बगावत की गवाही देता है, उसी अबूझमाड़ में बुधवार सुबह एक ऐसी कहानी लिखी गई, जिसकी स्याही थी — खून, गोली और हौंसले। नारायणपुर के बीहड़ों में बुधवार को सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई और जब धुंआ छंटा, तब जमीन पर 27 नक्सलियों के बेजान जिस्म पड़े मिले, वहीं, DRG के जवानों के हाथों में थी की जीत की नमी। नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और कोण्डागांव, इन चार जिलों से आई DRG की संयुक्त टीम ने चारों ओर से घेराबंदी की और फिर शुरू हुई वो मुठभेड़ जो नक्सलियों के लिए कहर बन गई। कहानी सिर्फ लाशों तक नहीं रुकी, सुरक्षाबलों को मिले AK-47, देसी रॉकेट लॉंचर, टाइमर बम, और वो किताबें जिनमें ‘क्रांति’ की आड़ में कब्रें खोदने की साजिशें छपी थीं। अबूझमाड़ वो नाम है, जो नक्सलियों के लिए शरण है, संग्राम है और संगठन का गर्भगृह। ये इलाका इतना दुर्गम है कि आज भी सरकार का नक्शा यहां अधूरा है। लेकिन DRG ने यह दिखा दिया बारूद की गलियों में भी कानून की रोशनी पहुंच सकती है। ठीक एक महीना पहले, छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर शुरू हुआ था ऑपरेशन ‘ब्लैक फॉरेस्ट’। अबतक 31 नक्सली मारे गये और हिडमा मदवी जैसे टॉप कमांडर की हनक टूट गई थी। जंगल में अब भी सर्च ऑपरेशन जारी है।
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