Bihar : बिहार की सियासत और सिस्टम से एक ऐसी खबर निकली है, जो सीधे आम आदमी की रोजमर्रा की परेशानी को छूती है। शहरी प्रशासन को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में सरकार ने करीब 119.90 करोड़ रुपये के बड़े प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह फैसला राष्ट्रीय शहरी डिजिटल मिशन (NUDM) के तहत लिया गया है, जिस पर मंत्रिमंडल की मुहर भी लग चुकी है। मुख्यमंत्री के “सात निश्चय-तीन” के तहत ईज ऑफ लिविंग को आसान बनाने की दिशा में यह बड़ा कदम है। राज्य के सभी नगर निकायों में एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार होगा। इस प्लेटफॉर्म पर नागरिकों को 19 तरह की सेवाएं ऑनलाइन मिलेंगी। इनमें प्रॉपर्टी टैक्स आकलन और भुगतान, ट्रेड लाइसेंस जारी करना, बिल्डिंग प्लान अप्रूवल, पेयजल और सीवरेज कनेक्शन, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, जन शिकायत निवारण, एनओसी और अन्य सेवायें शामिल होंगी। फिलहाल, अभी नगर निकायों में अलग-अलग सिस्टम होने के कारण काम में देरी, फाइलों का दोहराव, पारदर्शिता की कमी, आम लोगों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
नया सिस्टम: सब कुछ एक जगह, काम होगा फटाफट
नई व्यवस्था में सभी सेवायें केंद्रीकृत और मानकीकृत होंगी। इनमें सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, हार्डवेयर इंफ्रास्ट्रक्चर, 5 साल तक मेंटेनेंस, डबल एंट्री अकाउंटिंग सिस्टम शामिल होंगे। नगर निकायों के अधिकारियों और कर्मचारियों को डिजिटल सिस्टम पर खास ट्रेनिंग दी जायेगी। ताकि तकनीक के साथ काम तेज और बेहतर हो सके। इस पहल से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार होगा। निवेशकों के लिये माहौल और बेहतर बनेगा। सरकार का दावा है कि डिजिटल गवर्नेंस का मजबूत इको-सिस्टम तैयार होगा। अब नालियों, टैक्स, लाइसेंस और प्रमाण पत्र के लिये नगर निगम के चक्कर नहीं, मोबाइल ही नया दफ्तर बनेगा। छोटे दुकानदार से लेकर घर बनाने वाले तक, हर किसी के लिये यह बदलाव राहत लेकर आयेगा।
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