Ranchi(Kuldeep Tiwari) : सुबह की पहली किरण के साथ जब भगवान बिरसा जैविक उद्यान की नर्सरी में 18 नन्हे मोर चूजों की चहचहाहट गूंजी, तो यह झारखंड के वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में दर्ज होने वाला एक सुनहरा अध्याय भी बन गया। भगवान बिरसा जैविक उद्यान ने कृत्रिम ऊष्मायन (आर्टिफिशियल इन्क्यूबेशन) तकनीक के जरिये एक साथ 18 स्वस्थ मोर चूजों का सफल जन्म कराकर नया इतिहास रच दिया है। यह उपलब्धि न केवल झारखंड, बल्कि देशभर के चिड़ियाघरों में वैज्ञानिक संरक्षण की दिशा में एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।
विज्ञान और समर्पण ने मिलकर रचा कमाल
उद्यान प्रशासन के मुताबिक, पहली बार कृत्रिम ऊष्मायन तकनीक से एक साथ इतने अधिक मोर चूजों की सफल हैचिंग हुई है। अंडों को वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित रखा गया, तापमान और आर्द्रता का हर पल ध्यान रखा गया और पूरी प्रक्रिया विशेषज्ञों की निगरानी में पूरी की गई। नतीजा यह रहा कि सभी 18 चूजे पूरी तरह स्वस्थ अवस्था में बाहर आये। विशेषज्ञों का मानना है कि इस आधुनिक तकनीक से चूजों के जीवित रहने की संभावना पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ जाती है। यही वजह है कि इस सफलता को वन्यजीव संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे उद्यान के निदेशक जब्बर सिंह का मार्गदर्शन और जीव वैज्ञानिक पार्थ सारथी मंडल के नेतृत्व में पूरी टीम की अथक मेहनत रही। अंडों के चयन से लेकर हैचिंग तक हर चरण की बारीकी से निगरानी की गई और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पूरी प्रक्रिया को सफल बनाया गया। इस अभियान में सहायक वन संरक्षक अशोक कुमार सिंह, वन क्षेत्र पदाधिकारी गायत्री देवी, पशु चिकित्सक डॉ. ओम प्रकाश साहू, नर्सरी प्रभारी तथा उद्यान के पशुपालकों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सभी के सामूहिक प्रयास और वैज्ञानिक कार्यशैली ने इस उपलब्धि को संभव बनाया।
नन्हे मेहमानों की खास देखभाल
सभी 18 मोर चूजों को विशेष रूप से तैयार की गई नर्सरी में रखा गया है। यहां उनके भोजन, स्वास्थ्य और विकास पर विशेषज्ञों की चौबीसों घंटे नजर है, ताकि वे पूरी तरह स्वस्थ होकर प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप विकसित हो सकें।






