World Ozone Day 2021: हर साल 16 सितंबर को वर्ल्ड ओजोन डे मनाया जाता है। इंसानों को कई जानलेवा बीमारियों से बचाने वाली ओजोन परत के लिए कोरोना लॉकडाउन राहत वाला समय कहा जा सकता है। देश में लॉकडाउन का जो असर हुआ, उसका एक बड़ा फायदा ओजोन परत को भी मिला है। इस दिन को मनाने का मकसद लोगों को ओजोन परत के प्रति जागरूक करना है। ओजोन परत पृथ्वी को सूर्य की हानिकारक अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाने का काम करती है। ओजोन परत के बिना जीवन संकट में पड़ सकता है, क्योंकि अल्ट्रावायलेट किरणें अगर सीधे धरती पर पहुंच जाए तो ये मनुष्य, पेड़-पौधों और जानवरों के लिए भी बेहद खतरनाक हो सकती हैं। ओजोन परत, ओजोन अणुओं की एक परत है जो 10 से 50 किलोमीटर के बीच के वायुमंडल में पाई जाती है। ऐसे में ओजोन परत का संरक्षण बेहद महत्वपूर्ण है।
एनसीबीआई जर्नल में प्रकाशित भारतीय वैज्ञानिकों की रिसर्च कहती है, दुनिया के कुछ देशों में 23 जनवरी से लॉकडाउन लगने के बाद प्रदूषण में 35 फीसदी की कमी और नाइट्रोजन ऑक्साइड में 60 फीसदी की गिरावट आई। इसी दौरान ओजोन लेयर को नुकसान पहुंचाने वाले कार्बन का उत्सर्जन भी 1.5 से 2 फीसदी तक घटा और कार्बन डाई ऑक्साइड का स्तर भी कम हुआ। इसी साल अप्रैल महीने की शुरुआत में ओजोन लेयर पर बना सबसे बड़ा छेद अपने आप ठीक होने की खबर भी आई। वैज्ञानिकों ने कहा कि आर्कटिक के ऊपर बना दस लाख वर्ग किलोमीटर की परिधि वाला छेद बंद हो गया है।
ओजोन डे (Ozone Day) की थीम
इस साल वर्ल्ड ओजोन डे की थीम है ‘ओजोन फॉर लाइफ’ यानी धरती पर जीवन के लिए इसका होना जरूरी है। इस साल हम 35 साल के वैश्विक ओजोन परत संरक्षण का जश्न मना रहे हैं। इस थीम के जरिए लोगों को यह बताना है कि ओजोन पृथ्वी पर हमारे जीवन के लिए महत्वपूर्ण है और हमें अपनी भावी पीढ़ियों के लिए भी ओजोन परत की रक्षा करनी चाहिए।
Ozone Layer कैसे बनती है –
ऑक्सीजन के तीन अणु मिलकर ओजोन बनाते हैं। ओजोन की परत धरती से 10 किलोमीटर की ऊंचाई पर शुरू हो जाती है और 50 किलोमीटर ऊपर तक मौजूद रहती है। यह सूर्य की घातक किरणों से धरती की रक्षा करती है। यह परत इंसानों में कैंसर पैदा करने वाली सूरज की पराबैंगनी किरणों को रोकती है।
Ozone को नुकसान पहुंचाने वाले कण कैसे बनते हैं?
वातावरण में नाइट्रोजन ऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन जब सूर्य की किरणों के साथ प्रतिक्रिया करते हैं तो ओजोन प्रदूषक कणों का निर्माण होता है। वाहनों और फैक्ट्रियों से निकलने वाली कार्बन-मोनो-ऑक्साइड व दूसरी गैसों की रासायनिक क्रिया भी ओजोन प्रदूषक कणों की मात्रा को बढ़ाती हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, आठ घंटे के औसत में ओजोन प्रदूषक की मात्रा 100 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए।
कैसे हुई World Ozone Day की शुरुआत
16 सितंबर, 1987 को संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में ओजोन छिद्र से उत्पन्न चिंता के निवारण के लिए कनाडा के मांट्रियल शहर में दुनिया के 33 देशों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसे ‘मांट्रियल प्रोटोकॉल’ कहा जाता है। इसकी शुरुआत एक जनवरी, 1989 को हुई। इस प्रोटोकॉल का लक्ष्य वर्ष 2050 तक ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले रसायनों पर नियंत्रण करना था।प्रोटोकॉल के मुताबिक, यह तय किया गया था कि ओजोन परत का विनाश करने वाले पदार्थ क्लोरो फ्लोरो कार्बन (सीएफसी) के उत्पादन और उपयोग को सीमित किया जाए, लेकिन इस पर बहुत ज्यादा अमल नहीं हुआ। जिससे इसके हानिकारक प्रभाव भी झेलने पड़े।
इसके बाद 19 दिसंबर, 1994 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने 16 सितंबर को ओजोन परत के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किया। 16 सितंबर 1995 को पहली बार विश्व ओजोन दिवस मनाया गया।
इसे भी पढ़ें : Deepika Padukone : रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण ने दी खुशखबरी…
इसे भी पढ़ें : Akshaya Tritiya 2026 : अक्षय तृतीया पर महासंयोग, आज इनपर बरसेगी असीम कृपा…
इसे भी पढ़ें : Jubin Nautiyal : चुपके से रचाई शादी, फैंस बोले, दिल खुश हो गया…
इसे भी पढ़ें : तेहरान पर बरसीं मिसाइलें, ईरान ने कहा, “जवाब देंगे और जोरदार देंगे”…
इसे भी पढ़ें : PM मोदी के इंस्टाग्राम पर मचा तहलका






