Garhwa(Nityanand Dubey) : गढ़वा के श्रमिकों के लिये यह कोई आम दिन नहीं था। हर दिन की तरह सिर पर बोझ नहीं था, बल्कि इस बार उनके सम्मान में कॉफी की महक थी। SDO संजय कुमार ने जब श्रमिकों को ‘कॉफी विद एसडीएम’ के लिये न्योता दिया तो किसी को यकीन नहीं हुआ कि प्रशासन इस तरह भी उनसे जुड़ सकता है। लेकिन जब वे SDO के सभागार में पहुंचे, तो माहौल एकदम अलग था। सम्मान, संवाद और समाधान से भरा हुआ। श्रमिकों ने अपनी निजी और सामूहिक समस्याएं SDO के सामने रखीं। कहीं टूटी सड़कें थीं, कहीं बंद पड़ा पानी का स्रोत। किसी ने सरकारी राहत की गुहार लगाई, तो किसी ने अपने गांव के विकास की बात की। संजय कुमार ने भरोसा दिलाया कि हर समस्या का समाधान खोजा जायेगा। प्रशासन और श्रमिकों के बीच भरोसे की एक नई डोर बंधी।
श्रमशक्ति को सलाम
कार्यक्रम की शुरुआत श्रमिकों को अंगवस्त्र ओढ़ाकर सम्मानित करने से हुई। पहली बार अपने श्रम को इस रूप में पहचाने जाते देख श्रमिकों की आंखों में चमक थी। यह सिर्फ एक सम्मान नहीं था, बल्कि इस बात की स्वीकृति थी कि उनके बिना यह समाज अधूरा है। जिला परिवहन पदाधिकारी धीरज प्रकाश और श्रम अधीक्षक संजय आनंद ने श्रमिकों को उनकी भलाई के लिये चल रही योजनाओं की जानकारी दी। मजदूरी करने वाले इन हाथों को सरकारी सुरक्षा कैसे मिल सकती है, यह समझाया गया। जिन्होंने कभी अपने नाम पर किसी सरकारी योजना की उम्मीद नहीं की थी, उन्हें पहली बार एहसास हुआ कि वे भी लाभ उठा सकते हैं। मौके पर ही 11 श्रमिकों का निबंधन किया गया और 4 को श्रमिक कार्ड सौंपे गये। यह सिर्फ कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि उनके भविष्य की सुरक्षा का प्रमाण था।




