Kohramlive : हरियाणा में तीन निर्दलीय विधायकों के भाजपा से अलग होने के बाद सरकार अल्पमत में आ गई है। निर्दलीय विधायक रणधीर गोलेन, धर्मपाल गोंदर और सोमबीर सांगवान ने नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार से समर्थन वापस लेने का ऐलान किया है। खबर है कि ये तीनों विधायक चुनाव में कांग्रेस को अपना समर्थन दे सकते हैं। तीन निर्दलीय विधायकों के अलग होने के बाद से अब यह चर्चा जोरों पर है कि क्या हरियाणा सरकार गिर जायेगी? इन तीन विधायकों के समर्थन वापस ले लेने के बाद सरकार के पास इस वक्त 43 विधायकों का समर्थन रह गया है, वहीं बहुमत के लिये 45 विधायकों का समर्थन जरूरी है।
हरियाणा विधानसभा में 90 में से 88 सदस्य हैं। करनाल विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने हैं, क्योंकि पूर्व CM मनोहर लाल ने इस्तीफा देकर यह सीट मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के चुनाव लड़ने के लिए खाली की थी। अगर नायब सैनी चुनाव जीत जाते हैं तो यह आंकड़ा 44 हो जायेगा, लेकिन बहुमत की संख्या 45 होगी जो सरकार के पास नही है। मतलब साफ है कि सरकार अल्पमत में रहेगी। हरियाणा में भाजपा के 40 विधायक हैं। कांग्रेस पार्टी के पास 30 विधायक, जननायक जनता पार्टी के 10 विधायक हैं। वहीं, निर्दलीयों की संख्या 7 से 6 हो चुकी है, क्योंकि रणजीत चौटाला इस्तीफा दे चुके हैं। एक इंडियन नेशनल लोक दल के विधायक अभय चौटाला है। विपक्ष के पास इस समय 45 विधायक हैं।
वर्तमान में हरियाणा की नायब सैनी सरकार को 48 विधायकों का समर्थन प्राप्त था, जिसमें भाजपा के 41, हरियाणा लोकहित पार्टी के एक विधायक गोपाल कांडा और छह निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त था। पूर्व CM मनोहर लाल और रणजीत चौटाला पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। इसके बाद यह आंकड़ा भाजपा के पास 46 का रह गया था। तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन वापस लेने के बाद सरकार के पास 43 विधायकों का समर्थन रह गया है।
कांग्रेस ला सकती है अविश्वास प्रस्ताव?
भविष्य में विधानसभा में विश्वास मत लाया जाता है तब सरकार के लिए मुसीबत आ सकती है। इससे पहले कांग्रेस बजट सत्र में अविश्वास प्रस्ताव सरकार के खिलाफ लेकर आई थी, जो ध्वनि मत से गिर गया था। वहीं सरकार जीत गई थी। जानकारों के अनुसार दो अविश्वास प्रस्ताव के बीच 6 महीने का समय होना जरूरी है, इस आधार पर अब 6 महीने तक सदन में अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता, जिससे भाजपा खुद को राहत महसूस कर सकती है।








