Kohramlive : जगन्नाथ रथ यात्रा सिर्फ एक शोभायात्रा नहीं, ईश्वर और भक्तों के मिलन का पर्व है। इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा देवी लकड़ी के विशाल रथों पर सवार होकर रांची और पुरी की सड़कों पर नगर दर्शन के लिये निकलते हैं। पुरी (उड़ीसा) में यह यात्रा भगवान के मौसी के घर यानी गुंडिचा मंदिर तक जाती है, जहां वे कुछ दिन आतिथ्य स्वीकार कर विश्राम करते हैं। भक्ति, परंपरा और पावन मिलन के इस पर्व में रथ यात्रा से पहले भगवान अनासरा जाते हैं, एकांत में विश्राम पर। 15 दिन तक भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जन-दर्शन से दूर रहते हैं। इसे ‘अनासरा’ कहा जाता है, एक विशेष उपचार काल। 11 जून से 26 जून तक अनासरा अवधि माना गया। भगवान की प्रतिमाएं इस दौरान विश्राम में रहती हैं, ताकि रथ यात्रा से पहले पुनः उर्जावान हो सकें।
क्यों जाते हैं भगवान मौसी के घर?
कथा अनुसार, एक बार देवी सुभद्रा नगर दर्शन की इच्छा प्रकट करती हैं। भगवान जगन्नाथ और बलभद्र उन्हें लेकर रथ पर निकलते हैं और गुंडिचा देवी के आमंत्रण पर कुछ दिन मौसी के घर ठहरते हैं। यही प्रसंग आज रथ यात्रा उत्सव का मूल आधार बन गया है। रथ यात्रा में हर जाति, वर्ग और समुदाय के लोग रथ खींचते हैं। यह माना जाता है कि भगवान के रथ की रस्सी पकड़ना मोक्ष का मार्ग खोलता है। पूरा वातावरण हरि-नाम, भजन और जयकारों से गूंज उठता है। यह दृश्य श्रद्धा, समर्पण और सांस्कृतिक एकता की अद्भुत मिसाल होता है। रथ यात्रा के दौरान पुरी और रांची में भारी भीड़ और आस्था का सैलाब उमड़ता है।
रथ यात्रा 2025 का विस्तृत कार्यक्रम
- 26 जून – गुंडिचा मरजना (मंदिर की सफाई)
- 27 जून – रथ यात्रा आरंभ (शुभ मुहूर्त: 11.13 AM से)
- 1 जुलाई – हेरा पंचमी (लक्ष्मी जी का आगमन)
- 4 जुलाई – बहुदा यात्रा (भगवान की वापसी यात्रा)
- 5 जुलाई – सुना बेशा (स्वर्ण पोशाक दर्शन)
- 5 जुलाई – नीलाद्री विजय (मुख्य मंदिर में वापसी)
रथ यात्रा के रथों की भव्यता
| देवता | रथ नाम | पहियों की संख्या | रंग | ध्वज |
|---|---|---|---|---|
| भगवान जगन्नाथ | नंदीघोष | 18 | लाल-पीला | गरुड़ध्वज |
| बलभद्र | तालध्वज | 16 | नीला | तालध्वज |
| सुभद्रा | दर्पदलन | 14 | काला | पद्मध्वज |














