Garhwa(Nityanand Dubey) : गर्मी की दोपहर थी, सूरज आंखों में चुभ रहा था और एक टूटी हुई कच्ची झोपड़ी में भुलाई बियार और मूर्ति देवी, उम्र की दहलीज़ पार कर चुके दो थके हुये जिस्म, रोटी और पेंशन की आस में बैठ थे। लेकिन…इस बार फरियाद किसी काग़ज़ पर नहीं सिसकी, खुद SDO संजय कुमार उनकी चौखट तक चलकर आये। उनके हाथों में राशन का एक बोरा था। इसके बाद SDO ने वहीं से SBI के मैनेजर को फोन लगाया और कुछ ही पलों में हल निकल आया। बुजर्ग दंपत्ति को उनका पेंशन मिल गया। वहीं, CO और BDO को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि जब तक राशन कार्ड में इनका नाम नहीं जुड़ता, तब तक हर माह राशन इनके घर पहुंचे। वहीं, SDO संजय कुमार ने खुद अपने स्तर से दवाइयों के लिए कुछ पैसे भी दिये।
बेटों को चेतावनी, मोहब्बत की भाषा में
SDO संजय कुमार ने बुजुर्गों के बेटों से कहा, अब कोई बहाना नहीं चलेगा, अगर मां-बाप को परेशानी हो, तो प्रशासन को बताओ… पर उन्हें नजरअंदाज़ मत करो। वहीं, गांव के लोगों ने कहा, “हमने अफसर तो बहुत देखे हैं, पर ऐसा इंसान कम देखा है। इंसानियत का काम जब अफसर करने लगे, तो सिस्टम नहीं, समाज जीतता है।”








