रांची (सत्य शरण मिश्र/ संजय कपरदार) : जो निभा नहीं सकते, वह वादा नहीं करना चाहिए। वादा कर गये थे कि एक पेट्रोल पंप और जमीन देंगे। कुछ नहीं मिला। यहां तक बोल गये थे कि जब कभी मेरी जरूरत पड़े तो बस एक फोन कर लीजिएगा। दिन-रात, 24 घंटे हम आपके लिए उपलब्ध हैं। पर अब फोन करते हैं तो कभी फोन नहीं उठाते। दर्शन भी नहीं देते। कभी घर का आंगन भी झांकने नहीं आये मंत्री बादल पत्रलेख। ये कहना है लद्दाख में शहीद हुए अभिषेक के भाई-बहन और नाते-रिश्तेदारों का। 24 अक्टूबर 2020 को लद्दाख में ड्यूटी के दौरान शहीद हुए थे चान्हो के चोरेया गांव के अभिषेक कुमार। वहीं मंत्री बादल पत्रलेख का कहना है कि कार्य प्रोसेस में है। जमीन और पेट्रोल पंप उन्हें जरूर मिलेगा, पर कब मिलेगा ये तारीख फिलहाल तय नहीं।
शहीद होने के 4 दिन पहले ही अभिषेक ने मां को फोन कर कहा था… धैर्य रखो बस एक महीने बाद नीचे उतरेंगे और घर आकर यहां की पूरी कहानी बतायेंगे। आज भी उसकी मां को वह मनहूस दिन याद है। जब उसका जांबाज बेटा लद्दाख में माइनस 8 डिग्री पारा में ड्यूटी की दौरान पहाड़ से नीचे गिरा। नीचे लगा माइंस ब्लास्ट कर गया और शहीद हो गया उसका बेटा। 4 दिन तक अभिषेक की मां से यह बात छिपाई गई। मां का कलेजा तब फट गया, जब तिरंगे में लिपटा आया बेटा का पार्थिव शरीर।













