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छठ महापर्व में खरना का क्या है महत्व, जानें पूजन विधि और अर्घ्य देने का सही समय

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kohramlive desk : छठ महापर्व की शुरुआत 8 नवंबर को नहाय-खाय के साथ हो चुकी है। नहाय-खाय के बाद उसके दूसरे दिन खरना मनाया जा रहा है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को खरना मनाया जाता है। खरना में दिन भर व्रत के बाद व्रती रात को पूजा के बाद गुड़ से बनी खीर खाकर, उसके बाद से 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू करते हैं। दरअसल, छठ महापर्व के दूसरे दिन खरना होता है।  खरना को लोहंडा भी कहा जाता है।

खरना पर बनती है रसिया (खीर)

खरना के दिन खीर का विशेष प्रसाद बनाया जाता है। पूजा के लिए गुड़ से बनी खीर बनाई जाती है, जिसे कुछ जगहों पर रसिया भी कहा जाता है। बता दें कि मिट्टी के नये चूल्हे पर आम की लकड़ी की आग जलाकर ये प्रसाद बनाया जाता है. बदलते दौर में अब लोग नए गैस चूल्हे पर भी इसे बनाते हैं। खरना वाले दिन पूरियां और मिठाइयों का भी भोग लगाया जाता है। बता दें कि खरना के दिन प्रसाद के रूप में गुड़ और चावल की खीर बनाई जाती है। इसके अलावा पूड़िया, ठेकुआ , खजूर बनाया जाता है। पूजा के लिए मौसमी फलों और सब्जियों का इस्तेमाल होता है। खरना के दिन प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रत की शुरुआत होती है। खरना के दिन से छठ पूजा समाप्त होने तक व्रत करने वाले लोग चादर बिछाकर सोते हैं।

खरना का महत्व क्या है 

इस दिन व्रती शुद्ध मन से सूर्य देव और छठ मां की पूजा करके गुड़ की खीर का भोग लगाती हैं। खरना का प्रसाद काफी शुद्ध तरीके से बनाया जाता है। खरना के दिन जो प्रसाद बनता है, उसे नए चूल्हे पर बनाया जाता है। व्रती इस खीर का प्रसाद अपने हाथों से ही पकाती हैं। खरना के दिन व्रती महिलाएं सिर्फ एक ही समय भोजन करती हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से शरीर से लेकर मन तक शुद्ध हो जाता है।

खरना की विधि

  • इस दिन महिलाएं और छठ व्रती सुबह स्नान करके साफ वस्त्र धारण करती हैं।
  • व्रती नाक से माथे के मांग तक सिंदूर लगाती हैं।
  • खरना के दिन व्रती दिन भर व्रत रखती हैं और शाम के समय लकड़ी के चूल्हे पर साठी के चावल और गुड़ की खीर बनाकर प्रसाद तैयार करती हैं।
  • सूर्य भगवान की पूजा करने के बाद व्रती महिलाएं इस प्रसाद को ग्रहण करती हैं।
  • इस प्रसाद को ग्रहण करने के बाद ही व्रती महिलाओं का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाता है।
  • मान्यता है कि खरना पूजा के बाद ही घर में देवी षष्ठी (छठी मइया) का आगमन हो जाता है।

खरना के दिन प्रथम अर्घ्य देने का समय

  • 9 नवंबर को खरना किया जाएगा और शाम के समय अस्त होते सूर्य को प्रथम अर्घ्य दिया जाएगा।
  • 9 नवंबर 2021 सूर्यास्त समय- 17:29:59।
  • झारखंड की राजधानी रांची में सूर्योदय का समय 5:07 PM है, जबकि सूर्य अस्त 6:00PM होगा।
  • जमशेदपुर में सूर्योदय का समय 5:04 PM है, जबकि सूर्य अस्त 5:56PM होगा।
  • डालटेनगंज में सूर्योदय का समय 5:10 PM है, जबकि सूर्य अस्त 6:06PM होगा।
  • बोकारो में सूर्योदय का समय 5:02 PM है, जबकि सूर्य अस्त 5:58PM होगा।
  • चाईबासा में सूर्योदय का समय 5:05 PM है, जबकि सूर्य अस्त 5:57PM होगा।
  • देवघर में सूर्योदय का समय 4:58 PM है, जबकि सूर्य अस्त 5:56PM होगा।
  • दुमका में सूर्योदय का समय 4:57 PM है, जबकि सूर्य अस्त 5:54PM होगा।
  • गिरिडीह में सूर्योदय का समय 5:00 PM है, जबकि सूर्य अस्त 5:57PM होगा।

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