UP : दवा कारोबारी आलोक मिश्रा के बेटे आरव मिश्रा (16) ने घर में फांसी लगाकर जान दे दी। आरव द जैन इंटरनेशनल स्कूल में 11वीं कक्षा का छात्र था और स्टेट लेवल स्विमिंग खिलाड़ी भी रह चुका था। घटना के समय घर में उसकी दादी नीलम थीं। शाम करीब साढ़े चार बजे जब उन्होंने आरव को आवाज दी और कोई जवाब नहीं मिला, तो पड़ोसियों की मदद से दरवाजा तोड़ा गया। अंदर आरव पंखे से लटका मिला। आरव की जेब से एक कागज मिला जिस पर लिखा था “Note for mobile”। मोबाइल जांचने पर पुलिस को एक अंग्रेजी संदेश मिला, जिसमें लिखा था — “सपने में चार चेहरे दिखते है जो कहते हैं कि खुद जान दे दो या मां-बाप और बहन को मार दो।” पुलिस जांच में सामने आया कि आरव पिछले एक साल से सीजोफ्रेनिया नामक मानसिक बीमारी से पीड़ित था। वह बिना बताये गूगल पर बार-बार अपनी बीमारी के लक्षण सर्च करता था। करीब 60 से अधिक बार उसने संबंधित जानकारी देखी।
दीपावली पर उसने अपनी बड़ी बहन मान्या को बताया था कि उसे कुछ “चेहरे” दिखाई देते हैं जो उसे डराते हैं, लेकिन परिवार ने इसे ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया। डॉक्टरों के अनुसार, सीजोफ्रेनिया में मरीज को भ्रम और “आदेशात्मक आवाजें” सुनाई देती हैं जो उसे खुद या दूसरों को नुकसान पहुंचाने के लिए उकसाती हैं। दिमाग में डोपामीन नामक न्यूरोकेमिकल का असंतुलन इसका मुख्य कारण माना जाता है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के डॉ. धनंजय चौधरी के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति में चुप रहने, समाज से कटने, खुद से बातें करने या अजीब व्यवहार जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत मनोचिकित्सक से संपर्क करना चाहिये।








