Kohramlive desk: राष्ट्रपति के बेड़े के विशेष घोड़े ‘विराट’ को प्रेजिडेंट्स बॉडीगार्ड के चार्जर के तौर पर भारतीय सेना ने विशेष सम्मान दिया है। राष्ट्रपति के अंगरक्षक बेड़े में शामिल यह घोड़ा आज रिटायर हो गया है। बता दें गणतंत्र दिवस का 73वें समारोह राजपथ पर समाप्त हुआ, राष्ट्रपति के अंगरक्षक (पीबीजी) राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को वापस राष्ट्रपति भवन ले गए। पीबीजी में खास घोड़े विराट की मौजूदगी ने इस मौके को खास बना दिया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने विराट का सिर थपथपा कर उसे विदा किया।


73वें गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति के अंगरक्षक के घोड़े ‘विराट’ को विदाई दी। घोड़ा विराट 13 साल की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी पीएम मोदी और राष्ट्रपति के साथ इस समारोह में शामिल हुए। सभी ने घोड़ा ‘विराट’ को विदाई दी। विराट 73वें गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय राजधानी में राजपथ पर आयोजित कार्यक्रम में अपनी आखिरी गणतंत्र दिवस परेड में भाग लिया।
President Ram Nath Kovind, PM @narendramodi & Defence Minister @rajnathsingh bid farewell to Virat, the elite horse of President’s Bodyguard.
Virat has served the President’s Bodyguard since 2003 & has made successful appearances in the Republic Day event 13 times. pic.twitter.com/GGgjOqIn6l
— Prasar Bharati News Services पी.बी.एन.एस. (@PBNS_India) January 26, 2022
2003 में सुरक्षा बेड़े में किया गया था शामिल
परेड के दौरान विराट को सबसे भरोसेमंद घोड़ा माना जाता है। हनोवेरियन नस्ल के घोड़े को 2003 में अंगरक्षक परिवार में शामिल किया गया था। उन्हें राष्ट्रपति के अंगरक्षक का “चार्जर” कहा जाता है। यह घोड़ा अपने नाम के मुताबिक बहुत ही सीनियर, अनुशासित और आकर्षक कदकाठी का है। यह घोड़ा 2003 में हेमपुर के रिमाउंट ट्रेनिंग स्कूल एंड डिपो से तीन साल की उम्र में यहां लाया गया था और जल्द ही सबकी आंखों का तारा बन गया।

राष्ट्रपति के अंगरक्षक भारतीय सेना में सबसे विशिष्ट रेजिमेंट हैं, जिन्हें हजारों की संख्या में ऊंचाई और विरासत के आधार पर चुना जाता है और उनकी स्थिति के अनुरूप बेहतरीन रेगलिया में बिस्तर लगाया जाता है। 200-मजबूत घुड़सवार इकाई, सदियों से ब्रिटिश वायसराय से लेकर आधुनिक समय के राष्ट्राध्यक्षों तक, भारत के सबसे ऊपर वाले वीआईपी को सौंपी गई है। एक अधिकारी ने विराट को लेकर बताया है कि 2021 में गणतंत्र दिवस परेड और बीटिंग द रिट्रीट समारोह के दौरान घोड़े ने अपने बुढ़ापे के बावजूद असाधारण रूप से अच्छा प्रदर्शन किया था। विराट को मौजूदा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ ही पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, प्रणब मुखर्जी को औपचारिक परेडों में अनुग्रह और गरिमा के साथ एस्कॉर्ट करने का गौरव प्राप्त है परेड के दौरान विराट को सबसे भरोसेमंद घोड़ा माना जाता है। हनोवेरियन नस्ल के घोड़े को 2003 में अंगरक्षक परिवार में शामिल किया गया था। उन्हें राष्ट्रपति के अंगरक्षक का “चार्जर” कहा जाता है। यह घोड़ा अपने नाम के मुताबिक बहुत ही सीनियर, अनुशासित और आकर्षक कदकाठी का है। यह घोड़ा 2003 में हेमपुर के रिमाउंट ट्रेनिंग स्कूल एंड डिपो से तीन साल की उम्र में यहां लाया गया था और जल्द ही सबकी आंखों का तारा बन गया।

राष्ट्रपति के अंगरक्षक भारतीय सेना में सबसे विशिष्ट रेजिमेंट हैं, जिन्हें हजारों की संख्या में ऊंचाई और विरासत के आधार पर चुना जाता है और उनकी स्थिति के अनुरूप बेहतरीन रेगलिया में बिस्तर लगाया जाता है। 200-मजबूत घुड़सवार इकाई, सदियों से ब्रिटिश वायसराय से लेकर आधुनिक समय के राष्ट्राध्यक्षों तक, भारत के सबसे ऊपर वाले वीआईपी को सौंपी गई है। एक अधिकारी ने विराट को लेकर बताया है कि 2021 में गणतंत्र दिवस परेड और बीटिंग द रिट्रीट समारोह के दौरान घोड़े ने अपने बुढ़ापे के बावजूद असाधारण रूप से अच्छा प्रदर्शन किया था। विराट को मौजूदा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ ही पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, प्रणब मुखर्जी को औपचारिक परेडों में अनुग्रह और गरिमा के साथ एस्कॉर्ट करने का गौरव प्राप्त है।






