धरती का वीरू, हिंदी सिनेमा का अमर अभिनेता…

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Kohramlive : सिनेमा का आकाश आज थोड़ा धुंधला पड़ गया। हिंदुस्तान के दिलों में ही-मैन के नाम से बसे धर्मेंद्र अब हमारे बीच नहीं रहे। जो मुस्कान कभी पर्दे पर रोशनी बिखेरती थी, आज वही मुस्कान यादों में बदल गई है। धर्मेंद्र की जिंदगी उतनी ही रंगीन थी, जितनी जटिल। बहुत कम उम्र में हुई पहली शादी और फिर जीवन में आया वह मोड़, जब उनका नाम हेमा मालिनी के साथ जुड़ा। मीडिया की तीखी निगाहें, घर–परिवार का दबाव और समाज की हलचल, लेकिन प्रेम वहीं रहता है जहां उसे होना चाहिये। उन्होंने जीवनसाथी चुन लिया। कहा गया कि हेमा मालिनी की मां राजी नहीं थीं, पर प्रेम किसने रोका है? दोनों ने शादी की और फिर जिंदगी की राह दो परिवारों में बंट गई, पर किसी दिल के साथ भी बुरा नहीं हुआ। एक तरफ सनी और बॉबी, दूसरी तरफ ईशा और आहना। दो घर, दो संस्कृतियां, पर सिर्फ एक धर्मेंद्र, जो दोनों दिशाओं में बराबरी से धूप बांटते रहे। ‘बेताब’ का मुहूर्त उन्होंने अपनी पहली पत्नी प्रकाश कौर से करवाया, यह उनके व्यक्तित्व की गहराई को बताने के लिये काफी है। प्यार, जिम्मेदारी और आदर, तीनों साथ चले, बिना किसी शोर के।

शोले का दौर और गॉसिप का तूफान

“वीरू और बसंती” इस जोड़ी ने जितनी धूम मचाई, उतनी ही गॉसिप भी। कहा गया कि वीरू का रोल इसलिये दिया गया
कि हेमा मालिनी के साथ ज्यादा फुटेज मिले। सच क्या था, किसी को कभी पूरी तरह मालूम नहीं, पर झूठ की रफ्तार अक्सर सच्चाई से तेज होती है। एक बार किसी रैली में उन्होंने मीडिया की तरफ बस गुस्से से देखा और अगले दिन वही हेडलाइन बन गई। यही थे धर्मेंद्र, निजी बातें दिल में रखते, पर दुनिया दिल में रख लेती थी। लोग उन्हें एक्शन हीरो मानते रहे, पर सिनेमा जानता है कि धर्मेंद्र सिर्फ ‘शरीर’ नहीं, ‘आत्मा’ का अभिनय भी करते थे। देवर, एक महल सपनों का, खामोशी, मुख्यमंत्री की चाकरी, इन फिल्मों में वह अभिनय नहीं करते थे, जीते थे। जब पोस्टर में वे सिर्फ पैंट पहने दिखे,
तो पूरा देश चौंक गया। पर यही चर्चा फिल्म की सफलता बनी, और यहीं से जन्म हुआ सिनेमा के असली ‘ही-मैन’ का।एक तरफ ‘यादों की बारात’ का एक्शन, दूसरी तरफ ‘चुपके चुपके’ की कॉमेडी। एक ही साल में ‘शोले’ का वीरू और
‘चुपके चुपके’ का प्रोफेसर, ऐसी रेंज आज भी दुर्लभ है। ‘विजेता फिल्म्स’ की शुरुआत की। ‘बेताब’, ‘घायल’, ‘बरसात’, धर्मेंद्र के फैसलों में संवेदनशीलता के साथ एक पिता की धड़कन भी शामिल थी। फिल्म फ्लॉप हो या हिट उन्होंने कभी पुराने प्रोड्यूसरों को नहीं छोड़ा। दिल से काम करते थे, तकनीक से नहीं।

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