Chandigarh (Bhawna/Nandani) : बेशक, किसी को चाहो, लेकिन इस कदर भी नहीं कि खुद को मिटा या तबाह बर्बाद कर डालो… जाने अनजाने शायद यहीं भूल इस नादान और नासमझ लड़की से हो गई। अपने दोस्त पर भरोसा कर गई। धोखा, दगा और फरेब की शिकार इस लड़की की हालत अब यूं हो गई है कि, वह किसी भी लड़के को देखते ही चीख उठती है। डरी सहमी इस लड़की की सांसे जोर-जोर से चलने लगती। धड़कन तेज हो जाती। हालत अब तब वाली हो जाती। उसकी दांस्ता रूह कंपा जाती। सामने किसी लड़के को देखते ही चीखने चिल्लाने, रोने लगती है। हाथ पैर सिकुड़ किसी कोने में दुबकने लगती। उसके मानस पटल पर तीखी चोटें लगी है। शायद यहीं वजह है कि उसकी इलाज, देखभाल और ख्याल रखने वाले सब के सब सिर्फ महिला डाक्टर और लेडी स्टाफ। पूरी कोशिश सिर्फ यह कि किसी पुरुष का चेहरा उसे न दिखे। कुछ गिने-चुने वहसी दरिंदों से मिले गहरे घाव उसके दिलो-दिमाग और बदन पर गहरा घाव छोड़ गये। उसकी बिगड़ी शक्ल सूरत इस बात की गवाह है कि उसके साथ बेइंतहा जुल्म हुआ। उसकी दास्तां सुन पुलिस तक रोई।
लगभग 14 साल की इस किशोरी का कसूर सिर्फ इतना था कि मदद करने के नाम पर जो भी शख्स सामने आया, उस पर भरोसा कर गई। 24 घंटे के अंदर 15 वहसी दरिंदो ने उसके बदन को नोंच डाला। उमर है 14 साल और रेपिस्ट 15… रेलवे स्टेशन के एक कोने में भूखी प्यासी और दर्द की मारी डरी-सहमी इस किशोरी पर रेलवे पुलिस की नजर पड़ी। पुलिस की वर्दी में सामने पुरुष पुलिस को खड़ा देख एक बार फिर से उसकी धड़कनें तेज हो गई। पर पुलिस अंकल को समझने में जरा भी देर नहीं लगी। बहुत प्यार से सबकुछ पूछा पर वह कुछ बोली नहीं। तब एक महिला पुलिस अधिकारी और सीडब्लयूसी से जुड़ी कुछ महिलाओं को बुलाया गया। लाड़, दुलार और पुचकार जब पूछा गया तो लड़की हौले-हौले गुजरी दास्तां बता गई। वहां तब मौजूद हर पुलिस अधिकारी के आंखों में आंसू छलक आये। चंडीगढ़ रेलवे पुलिस ने अंदर से हिल चुकी थी। चंडीगढ़ से लेकर मुंबई और पुणे तक एक सौ से भी ज्यादा सीसीटीवी फुटेज खंगाल डाले। एक क्लू मिला और सब के सब दरिंदों को धर दबोचा। पुलिस की अब कोशिश यह है कि यह मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में चले और मुजरिमों को फांसी पर लटकते देखें लोग।
दर्द भरी दांस्ता कुछ ऐसी उभर कर सामने आई है कि उसे सुन आपका भी दिल दरक जाये। लगभग 14 साल की यह किशोरी बिना बताये अपने घर से निकल गई। वह अपने दोस्त के बुलावे पर पुणे रेलवे स्टेशन पहुंच गई। दोस्त दगा दे गया। वह नहीं आया। फरेब की शिकार यह लड़की रोने लगी। अकबका गई कि अब उसका क्या होगा। उसका माथा काम नहीं कर रहा था। तभी उसके पास एक टेम्पो ड्राइवर मददगार बन सामने आया। उसकी परेशानी का सबब जान चला गया। थोड़ी देर बाद वहीं टेम्पो ड्राइवर पुनः आया और उससे बोला… तुम्हारा दोस्त बाहर खड़ा है, तुम्हें बुला रहा है, चलो। लड़की ने कहा… भैया, बहुत जोरों की प्यास लगी है, पहले पानी पीला दो… उसे पीने के लिए एक बोतल पानी दिया गया। पानी पीते ही वह मुर्छित हो गई। होश आया तो खुद को एक जंगल में पाई। उसका रेप हो चुका था। जंगल से फिर उसे एक लॉज में लाया गया। वहसीपन की पराकाष्ठा तब प्रबल हुई जब 12 लड़कों के सामने उसे परोस दिया गया। लड़की खूब रोई, गिड़गिड़ाई, पर किसी को तरस नहीं आया। बारी बारी से रात भर उसे खूब रौंदा गया। जब खाने को खाना मांगा तो उसे नशे का इंजेक्शन दे दिया गया। पकड़े जाने के डर से लड़की को दादर रेलवे स्टेशन पहुंचा दिया गया। वहां साफ सफाई करने वाले 2 लोगों ने भी उसे नहीं छोड़ा। लड़की के कोमल मन में ऐसा घाव लगा कि वह पागल सी हो गई। लड़की को एक ट्रेन में बैठा दिया गया। इस ट्रेन का आखिरी स्टॉपेज चंडीगढ़ था। ट्रेन से उतर कर वह एक कोने में जा कपस-कपस रोने लगी। पुलिस जब पास गई तो सारी दास्तां छनकर सामने आ गई। चंडीगढ़ पुलिस ने सबसे पहले पुणे के उस थाने में संपर्क किया, जहां की लड़की रहनेवाली है। पता चला कि लड़की के घरवालों ने गुमशुदगी की रपट दर्ज करा रखी है। पुलिस ने फौरी कार्रवाई कर उन हैवानों को खोज निकाला, जिसने एक कली को खिलने से पहले ही मसल डाला। पुलिस ताबड़तोड़ कार्रवाई कर खूब वाहवाही बटोर रही है। सब की जुबां से एक ही शब्द निकले… पुलिस को सैल्यूट।






