Ranchi : राजधानी रांची के करम टोली धूमकुडिया में आज मुख्य पाहन जगलाल पाहन की अगुवाई में विभिन्न आदिवासी और सामाजिक संगठनों की अहम बैठक हुई। बैठक में सूर्या हांसदा के एनकांउटर को “राजनीतिक साजिश और आदिवासी अस्मिता पर हमला” बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि सूर्या हांसदा न सिर्फ सामाजिक कार्यकर्ता थे, बल्कि चार बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके थे। वे लगातार हेमंत सरकार के गैर-कानूनी कार्यों के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। इल्जाम है कि सूर्या हांसदा को कुख्यात अपराधी बताकर फर्जी एनकाउंटर में मार दिया गया।
वक्ताओं ने कहा, “यह हत्या सिर्फ सूर्या की नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी समाज की आवाज को कुचलने की कोशिश है।” रूपा तिर्की, उमेश कच्छप, संध्या टोपनो, सुभाष मुंडा, अनिल टाइगर और अब सूर्या हांसदा इन सभी मामलों को जोड़ते हुये वक्ताओं ने सरकार पर निशाना साधा और कहा कि “अबुआ सरकार” आदिवासियों की आवाज को लगातार दबा रही है।
23 अगस्त को होगा ‘राजभवन जन आक्रोश मार्च’
सभी संगठनों ने मिलकर फैसला लिया है कि 23 अगस्त को रांची स्थित राजभवन तक जन आक्रोश मार्च निकाला जायेगा, जिसमें सैकड़ों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग हिस्सा लेंगे। बैठक में जगलाल पाहन, बबलू मुंडा, महादेव टोप्पो, आरती कुजूर, पिंकी खोया, सनी टोप्पो, रितेश उरांव, मुन्ना टोप्पो, उर्मिला उरांव और कई अन्य सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद थे।








