Ranchi (भावना ठाकुर/श्वेताभ) : सबके मनवा में कसक छोड़ गये ट्रैजेडी किंग दिलीप कुमार। एक फल विक्रेता के घर जन्में मो युसूफ सरवर खान की घर की माली हालत ठीक नहीं थी। 12 भाई बहनों के साथ मुंबई में रहने वाले युसूफ खान ने एक दिन मन बनाया कि कुछ अलग करना है। इसी सोच के साथ घर छोड़ पुणे आ गये। पुणे की ब्रिटिश आर्मी कैंटीन में असिस्टेंट की नौकरी मिल गयी। महीना 36 रुपये मिलते थे पगार। यहीं अपना सैंडविच काउंटर भी खोल लिया। अंग्रेजों को खूब भाता था उनका बनाया हुआ सैंडविच। भारत की आजादी की लड़ाई में सुर मिलाने के जुर्म में गिरफ्तार हुए थे। फिर मुंबई वापस लौट आये और पिता के काम में हाथ बंटाने लगे। तकिया बेचना शुरू किया, पर फेल हो गया यह बिजनेस। हुनर था, ठान लिया मेहनत करने को… और पहुंच गये बॉम्बे टॉकिज के दफ्तर। यहां मिली देविका रानी ने उन्हें काम और नाम दोनों दिया। नया नाम पड़ा दिलीप कुमार। यहीं से सफरनामा शुरू हुआ बॉलिवुड का। कभी 36 रुपया महीना कमाने वाले दिलीप कुमार आज की तारीख में 627 करोड़ से ज्यादा के मालिक हैं। वर्ष 1944 में पहली फिल्म ज्वार भाटा पिट गई। इसके फिल्म में मेहनताना मिले थे 1250 रुपये। 1947 में फिल्म जुगनू ने ऐसा कमाल कर दिखाया कि वे फेमस हो गये। धन, दौलत, शोहरत के धनी दिलीप कुमार ने पांच दशक में करीब 60 फिल्मों में काम किया। उन्होंने कई फिल्मों को ठुकरा दिया था। उनका मानना था कि फिल्में कम हो, लेकिन बेहतर हो। 11 दिसंबर 1922 को जन्में दिलीप कुमार ने सबसे ज्यादा फिल्में हिरोइन नरगिस, मधुबाला, वैजयंती माला, मीना कुमारी और सायरा बानो के साथ काम किया। फिल्मी जगत में चर्चा है कि एक बार सायरा बानो के साथ काम करने से मना कर दिया था। उनके अल्फाज थे.. सायरा छोटी है। पर यही सायरा वास्तविक जीवनसंगिनी बनी। दोनों की जोड़ी ने फिल्म गोपी (1970), सगीना (1974) और बैराग (1976) जैसी हिट फिल्में दी। एक से एक फिल्म हिट होती चली गयी। पद्मभूषण, पद्मविभूषण से लेकर दादा साहब फाल्के पुरुस्कार से नवाजे गये। महानायक दिलीप कुमार भारतीय सिनेमा के सबसे रोशन चिराग में से एक माने जाते हैं। दिलीप कुमार एक अभिनेता होने के साथ साथ एक नेक दिल इंसान भी थे।
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बीते महीने 6 जून को महानायक की तबीयत बिगड़ी थी। उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। हिंदुजा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत में सुधार हुआ और 11 जून को उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गयी। इसके बाद 30 जून को फिर उनकी तबीयत बिगड़ी और सात जुलाई की सुबह हिंदुजा अस्पताल में उनका देहांत हो गया। अदाकारी में दिलीप कुमार की कोई सानी नहीं। भले ही वो गुजर गये, पर जमाना उन्हें याद रखेगा।






