UP : अलीगढ़ का यूसुफ खां एक सीधा-सादा मजदूर था। सपने उसके भी थे, घर था, बीवी थी, दो मासूम बच्चे थे पर किस्मत ने उसके हिस्से में सिर्फ़ दर्द लिखा था। 29 जुलाई की सुबह वो रोज की तरह घर से निकला, काम की तलाश में लेकिन लौटकर फिर कभी नहीं आया। चार दिन बाद, उसका झुलसा हुआ शरीर, बांधे हुये हाथ और तेजाब से गला चेहरा, कासगंज के एक वीरान भट्ठे की झाड़ियों में पड़ा मिला। उसकी आंखें नहीं रहीं, चेहरे पर पहचान बाकी न रही बची थी सिर्फ़ चप्पलें और लहूलुहान कपड़े, जिन्हें देखकर घरवालों ने कहा “ये यूसुफ है…”
पोस्टमार्टम ने सारी परतें खोल दीं। पेट पर वार, शरीर पर तेजाब और कीड़े पड़े शव ने बता दिया कि मौत कोई दुर्घटना नहीं ये तो सुनियोजित साज़िश थी। परिजन बोले “यही तो कहता था यूसुफ, तब्बसुम अब मुझसे दूर हो गई है… किसी और की हो गई है।”अब इल्ज़ाम यूसुफ की पत्नी तब्बसुम पर और उसके प्रेमी दानिश पर है। आरोप है कि दानिश ने पहले दोस्ती की, फिर घर में दखल बनाया और प्यार में डूबी तब्बसुम के साथ मिलकर यूसुफ को मिटा दिया। अब तब्बसुम भी ग़ायब है… दानिश भी। पीछे रह गये दो मासूम बच्चे, एक टूटा हुआ बाप और एक ऐसा सच जो तेजाब से भी नहीं धुंधला हो सका।






