Ranchi : CM हेमंत सोरेन ने कहा कि लाह, इमली, कोदो, कुटकी, सरगुजा, चिरौंजी, आंवला, महुआ, करंज, रेशम और तसर जैसे कई वनोपज झारखंड में हैं, बाजार में इसका डिमांड भी खूब है, लेकिन उत्पादकों को इसका उचित फायदा नही मिल रहा है। उन्होंने वैल्यू एडिशन के साथ जियो टैगिंग करने की दिशा में कदम उठाने पर जोर दिया, ताकि इन वनोपजों को बाजार में बेच कर किसानों को पूरा फायदा मिल सके। इससे वैश्विक बाजार में भी झारखंड को एक अलग पहचान मिलेगी। CM ने राज्यभर में चल रहे सभी लैम्प्स-पैक्स को पूरी तरह क्रियाशील करने और इससे छूटे सभी किसानों को जोड़ने को कहा। वहीं, लैम्प्स-पैक्स भवनों की मरम्मत कर उसे बेहतर बनाने का निर्देश दिया।
CM हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड में कृषि एवं वनोपज को बढ़ावा देने के लिये सिद्धो-कान्हो कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी संघ लिमिटेड का गठन हुआ है। इसका उद्देश्य विभिन्न वनोपज का उत्पादन, संकलन, प्रसंस्करण, अनुसंधान तथा विकास की विभिन्न गतिविधियों को सहकारी आधार पर संगठित करना है। ऐसे में इस सहकारी संघ की जानकारी किसानों तक पहुंचनी चाहिये, ताकि वे इससे जुड़कर उत्पादों का लाभ ले सकें। CM हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में सिद्धो-कान्हो कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी संघ लिमिटेड के निदेशक पर्षद की तृतीय बैठक में CM ने कहा कि लाह तथा रेशम-तसर की खेती की झारखंड में काफी संभावनाएं हैं। ऐसे में इसके उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में पहल करें।
वैकल्पिक कृषि के लिए किसानों को प्रशिक्षित करें
CM हेमंत सोरेन ने कहा कि आज जिस तरह मौसम में उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है, उससे परंपरागत कृषि बहुत प्रभावित हो रही है। ऐसे में किसानों को वैकल्पिक कृषि के लिए भी तैयार रहना होगा। कृषक पाठशाला राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है। इस कृषक पाठशाला में किसानों को वैकल्पिक खेती का प्रशिक्षण दें। उन्हें वनोपज से जोड़ें। इसके लिए उन्हें संसाधन भी उपलब्ध कराने की पहल करें, ताकि विपरीत परिस्थितियों में वे कृषि कार्य से जुड़कर अपने को मजबूत बनाये रख सकें। वहीं, केंदू पत्ता को भी सिद्धो-कान्हो कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी संघ के दायरे में लाने की संभावनाएं तलाशें। इससे केंदू पत्ता के उत्पादन से जुड़े श्रमिकों को फायदा मिलेगा।
फुदी केंद्र को प्रोफेशनल तरीके से चलाने का सुझाव
CM हेमंत सोरेन ने कहा कि फुदी स्थित नवनिर्मित सहकारिता प्रशिक्षण केंद्र में सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। उसे प्रोफेशनल तरीके से चलाया जायें | यदि आवश्यक हो तो राष्ट्रीय सहकारी संघ (NCUI) अथवा राष्ट्रीय प्रशिक्षण सहकारी परिषद् (NCCT) से MOU कर वहां प्रोफेशनल /वोकेशनल कोर्सेज करवाया जाये, ताकि राज्य के नवयुवकों का स्किल development हो, उन्हें रोजगार मिल सके। PPP मोड में भी चलने की संभावना तलाशी जायें। मधु संग्राहकों को उचित ट्रेनिंग दी जाये। उनका समूह बना कर सिध्कोफेड से जोड़ा जाये एवं उनके मधु को वैश्विक बाजार में उपलब्ध कराने के लिए अमूल, सफोला, हिमालय जैसी बड़ी कंपनियों-संस्थाओं से MOU किया जाये, ताकि मधु संग्राहकों लाभ हो सके।
बैठक में कृषि मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रधान सचिव वंदना दादेल, कृषि सचिव अबु बकर सिद्दीक, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग सचिव कृपानंद झा, सिद्धो-कान्हो कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी संघ के निदेशक सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी उमाशंकर सिंह, जेएसएलपीएस के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी संदीप सिंह एवं एपीसीसीएफ-सह- प्रबंध निदेशक जेएसएफडीसी वाईके दास मुख्य रूप से मौजूद थे।












