Kohramlive desk: दवाओं या टेबलेट के बीच में सीधी लाइन क्यों होती है और कई दवाओं पर क्यों नहीं होती है? क्या आपने कभी सोचा है कि यह बीच की लाइन को क्या कहते हैं ? आखिर इसका क्या काम होता है ?
टैबलेट के बीच बनी लाइन का नाम और इस्तेमाल
- दवाओं पर खींची गई इस सीधी लाइन को Debossed Line या पिल स्प्लिटर कहा जाता है। यह किसी डिजाइन के लिए नहीं डाली जाती है। इसका अपना इस्तेमाल होता है। हम जिन दवाइयों या टैबलेट्स का इस्तेमाल करते हैं, वह MG में मिलती हैं। जैसे 500 MG, 200 MG या 1000 MG। इन डोज का इस्तेमाल डॉक्टर्स रोग और तकलीफ के हिसाब से करते हैं। ऐसी स्थिति में जब दवा की डोज ज्यादा हो, लेकिन जरूरत कम हो, तब ये पिल स्प्लिटर काम आता है। इस लाइन के सहारे से दवा की डोज को आधा किया जाता है। इससे दवा आसानी से टूट जाती है।
- जैसे अगर आपके पास कोई दवा 500mg की हो और डॉक्टर ने आपको 250mg की ही जरूरत बताई है। यानी उन्होंने वही दवा 250mg की प्रेस्क्राइब्ड की है तो आप इस दवा को बीच में से आधा तोड़कर ले सकते हैं। यानी 500mg की वह दवा दो बराबर भाग में टूट जाए तो वह डोज 250mg की हो जाएगी।
- एक जरूरी बात ये कि आप सभी दवाओं के साथ ऐसा नहीं कर सकते। जिन दवाओं पर Debossed Line न हो, उन्हें अपने मन से बीच में से तोड़कर आधा नहीं लेना चाहिए। दूसरी जरूरी बात कि आप जो गोली आधी तोड़कर ले रहे हों, उसका बचा हुआ आधा हिस्सा अच्छी तरह रखें। अगर हवा या गंदगी लग जाए तो इसे इस्तेमाल न करें। सबसे जरूरी बात कि बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा नहीं लेनी चाहिए।
पत्ते पर बने लाल लकीर का मतलब
कुछ दवाइयों के पत्तों के पीछे लाल रंग की लकीर बनी होती है। इसका भी अपना मतलब है। अगर किसी भी टैबलेट के पीछे बनी है, तो इसका मतलब उसे किसी भी स्थिति में डॉक्टर्स के सलाह पर नहीं लेनी चाहिए। उसका अपना एक पूरा कोर्स होता है, जिसके बारे में डॉक्टर बताते हैं। (Source:Google )
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