Kohramlive : दिव्यांग चार बेटियों के बोझ और नौकरी चले जाने के चलते बिगड़ती माली हालत से दुखी होकर एक पिता हीरालाल ने अपनी चारों बेटियों के साथ खुदकुशी कर ली। खबर है कि सल्फास खाकर सबने खुद को खत्म कर लिया। हीरालाल की पत्नी की मौत करीब एक साल पहले ही हो गई थी। वो कैंसर रोग से पीड़ित थी। बेटियों की डेड बॉडी एक ही कमरे में बेड पर मिली। वहीं पिता हीरालाल दूसरे कमरे में मरे हालत में मिले। पत्नी की मौत के बाद से ही हीरालाल की परेशानी बढ़ गई थी। इस कारण वो अपनी ड्यूटी पर समय पर नहीं जा पाता था, जिसके चलते उनकी नौकरी भी चली गई थी। पेशे के कारपेंटर रहे पिता हीरालाल ने पहले सभी को सल्फास खिलाया और बाद में खुद भी खा लिया।
शवों के पास से पुलिस को सल्फास की गोलियां और कमरे के डस्टबिन में जूस के टेट्रा पैक और पानी की बोतल मिली है। घर से बदबू आने पर पड़ोसियों ने मकान मालिक व पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों से अंदर से बंद घर का दरवाजा तोड़ा तो वहां बाप-बेटियों की लाशें अलग-अलग कमरे में मिली। चारों बेटियां दिव्यांग होने की वजह से चलने फिरने में लाचार थीं। इनमें से एक बेटी को आंख से दिखता नहीं था। एक को चलने की में दिक्कत थी। बेटियों की उम्र 9 साल से लेकर 19 साल के बीच थी। बेटियों के नाम निधि, नीरू,निशि एवं नीतू बताये गये। दिल को झकझोर देने वाली यह घटना दिल्ली के वसंतकुंज के रंगपुरी गांव में हुई।
दिल्ली पुलिस ने मीडिया को बताया कि शुरुआती जांच से यह लग रहा है कि हीरलाल कारपेंटर का काम करता था। पत्नी की मौत के बाद से वह अकेला पड़ गया था। वह पूरी तरह से टूट चुका था। CCTV फुटेज में हीरालाल बीते 24 तारीख को घर के अंदर जाते दिखा है। वो गुजरे 28 वर्षों से इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर, वसंतकुंज में बढ़ई के पद पर काम करता था। वह 25 हजार रुपये प्रति माह कमाता था। जनवरी 2024 से वह वहां अपनी ड्यूटी पर ठीक से नहीं जा पा रहा था। सामूहिक सुसाइड करने वाले हीरालाल के भाई मोहन शर्मा और उनकी भाभी गुड़िया शर्मा के मुताबिक मृतक ने अपनी पत्नी की मृत्यु के बाद पारिवारिक मामलों में रुचि लेना बंद कर दिया था। हमेशा किसी न किसी अस्पताल में अपनी बेटियों के इलाज में बीजी रहता था। बेटियां शायद ही कभी अपने कमरे से बाहर निकलती थीं। मौके पर FSL की टीम को भी बुलाया गया।








