Ranchi : झारखंड विधानसभा में आज एक अहम मुलाकात हुई। असम के चाय बगान क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी परिवारों की फरियाद लेकर आदिवासी समन्वय समिति भारत (असम) का प्रतिनिधिमंडल CM हेमंत सोरेन से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने CM को बताया कि असम में बसे ये परिवार दशकों से अपनी पहचान, अधिकार और अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं, रोजगार में पिछड़ापन, शिक्षा से दूरी, सरकारी योजनाओं में उपेक्षा और चाय बगान मजदूरों को मिलने वाला बेहद कम वेतन। सदस्यों ने कहा कि “असम सरकार की उदासीनता ने समाज को दूसरे दर्जे का नागरिक बनाकर छोड़ दिया है।”
CM हेमंत सोरेन ने पूरी बात सुनी और भरोसा दिलाया कि “आपका हक, आपकी पहचान, दोनों की रक्षा हमारी जिम्मेदारी है। जल्द ही झारखंड सरकार का एक प्रतिनिधिमंडल असम जाकर आदिवासी परिवारों की स्थिति का आकलन करेगा। चाय बगानों में काम करने वाले आदिवासियों को एसटी का दर्जा दिलाने के लिये राज्य सरकार सकारात्मक पहल करेगी।दैनिक वेतन वृद्धि और भूमि संबंधी समस्याओं के समाधान पर भी सरकार ठोस कदम उठायेगी। CM ने यह भी कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और अस्मिता की रक्षा के लिये राज्य सरकार पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। ब्रिटिश शासन के दौरान झारखंड के कई आदिवासी परिवारों को असम के चाय बगानों में काम के लिये ले जाया गया था। आज, कई पीढ़ियों बाद भी वे पहचान और अधिकार की लंबी लड़ाई लड़ रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल ने CM हेमंत सोरेन से इस लड़ाई की अगुवाई करने की अपील की। मौके पर मंत्री चमरा लिंडा, आदिवासी समन्वय समिति भारत (असम) के
जीतेन केरकेट्टा, बिरसा मुंडा, तरुण मुंडा, गणेश, अजीत पूर्ति, राजेश भूरी, बाबूलाल मुंडा, मंगल हेंब्रम समेत कई सदस्य उपस्थित रहे।








