Ranchi (Rajesh/Vinod) : बालाश्रय में यौनाचार के मामले का खुलासा होने के बाद 26 अक्टूबर को उसे सील कर दिया गया। बालाश्रय में रह रहे 19 बच्चों को आदिम जनजाति सेवा मंडल, रांची के निवारनपुर में शिफ्ट कर दिया गया। बालाश्रय के बंद होने से कई लोगों के हाथों से काम भी छिन गया। वहीं बालाश्रय की इंचार्ज स्मिता सिन्हा पर पहले ही गाज गिर चुकी थी। उनकी इंट्री पर रोक लगा दी गई थी। स्मिता का कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने पाप को उजागर किया। उन्हें स्पष्टीकरण तक देना पड़ा था।
सूत्र बताते हैं कि ऐसी ही एक वारदात 2017 में भी हुई थी। एक बच्चे का यौन शोषण किया गया था। यह मामला भी थाने तक पहुंचा था, मगर तब इस मामले को लोग पी गये थे। यहां याद दिला दें कि 8 अक्टूबर को स्मिता को पता चला कि वहां तैनात गार्ड शंभू प्रसाद लोहरा ने एक 11 साल के बच्चे का यौन शोषण किया। बच्चों के अनुसार गार्ड ऑफिस आवर से पहले, ऑफिस आवर के बाद और छुट्टी के दिन कुकर्म करता था। बच्चों के मुंह से ये बात सुन छुट्टी से लौटी इंचार्ज स्मिता के होश उड़ गये। मामले को गंभीरता से लिया और इसकी जानकारी विभाग के संबंधित बड़े अधिकारियों तक पहुंचाई। इल्जाम है कि बड़े अधिकारियों ने इस पर कोई नोटिस नहीं किया। वजह साफ था कि संदेही गुनहगार गार्ड एक अधिकारी का साला है। इस अधिकारी के तथाकथित कई नाते-रिश्तेदार झारखंड के कई होम में तैनात हैं, जिनमें से कुछ का चरित्र भी संदिग्ध है। इंचार्ज स्मिता सिन्हा ने पंडरा थाने में 9 अक्टूबर को एफआईआर दर्ज करायी। एफआईआर दर्ज होते ही पुलिस ने फौरी कार्रवाई करते हुए गार्ड को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। वहीं रांची के डीसी ने इस मामले को काफी गंभीरता से लिया। उन्होंने इस मामले की जांच कराई। जांच में आरोप सही निकला। जिसके बाद मंगलवार को बालाश्रय को सील कर दिया गया।
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