Garhwa(Nityanand Dubey) : गढ़वा की सरजमीं बुधवार को एक नई शुरुआत का गवाह बना, जब राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) गढ़वा के सम्मेलन कक्ष में वेब प्रशिक्षण का वह दीप जलाया, जिसने न्याय तक पहुंच के रास्ते को रोशन करने की ठान ली है। यह कार्यक्रम विधिक सेवा प्रबंधन प्रणाली—LSMS—में आ रही तकनीकी चुनौतियों से सीधे दो-दो हाथ करने के लिये आयोजित किया गया था। गढ़वा सहित देश के कई जिलों में विधिक सेवाओं से जुड़े आवेदनों का ढेर लगा है, कई मासूम आवाजें न्याय की चौखट पर इंतजार में खामोश हैं। ऐसे में NALSA की यह मुहिम उम्मीद का वो दीपक है, जो देरी के अंधेरे को चीरकर नयी रौशनी बिखेरने का मादा रखता है।
LSMS पोर्टल, कानूनी सहायता का डिजिटल प्रहरी
NALSA द्वारा शुरू किया गया LSMS पोर्टल, आम लोगों को कानूनी सहायता, ई-फाइलिंग, परामर्श और मध्यस्थता जैसी सेवायें घर बैठे दिलाने की दिशा में एक मील का पत्थर रहा है। लेकिन हाल के महीनों में लॉगिन त्रुटियों से लेकर डेटा अपलोड की दिक्कतों ने इसकी रफ्तार पर ब्रेक सा लगा दिया था। इस वेब प्रशिक्षण के जरिये अब जमीनी स्तर पर इन तकनीकी गांठों को खोलने का संकल्प लिया गया है। प्रशिक्षण सत्रों में जोर इस बात पर रहा कि DLSA स्तर पर उठे किसी भी तकनीकी संदेह या समस्या का समाधान ‘वहीं, उसी वक्त’ कर दिया जाये।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गढ़वा के सचिव निभा रंजन रगड़ा ने कहा कि यह व्यावहारिक दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि हमारे अधिकारी और पैनल वकील प्रणाली को मजबूती से संभालें और कोई भी आवेदन अधर में न लटका रहे। सत्र में पोर्टल नेविगेशन, डेटा प्रबंधन और ट्रबलशूटिंग पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इसका मकसद पैनल वकीलों, कानूनी सहायता रक्षा काउंसिलों और कर्मचारियों को तकनीकी रूप से इतना सक्षम बनाना है कि कोई भी मामला केवल एक क्लिक की दूरी पर निपट सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बैकलॉग को घटाने के साथ कानूनी सहायता को और ज्यादा मानवीय, पारदर्शी और सुलभ बनायेगा। कुछ लोगों का कहना था कि यह पहल उस रास्ते का दरवाजा खोल सकती है, जहां तकनीक और न्याय हाथ में हाथ डालकर आगे बढ़ें और कोई भी आवाज अधूरी न रहे।








