Garhwa(Nityanand Dubey) : पलामू सांसद बीडी राम ने गढ़वा परिसदन में आयोजित प्रेसवार्ता में मनरेगा का नया नाम ‘विकसित भारत गारंटी व रोजगार आजीविका मिशन (VB-GRAM)’ रखे जाने पर सरकार का पक्ष साफ किया। उन्होंने कहा कि यह केवल नाम बदलना नहीं, बल्कि सोच और सिस्टम दोनों का बदलाव है। सांसद के मुताबिक नई पहचान के साथ योजना को अधिक असरदार, जवाबदेह और परिणामोन्मुखी बनाया गया है। इससे रोजगार के दिन बढ़े 100 से बढ़ाकर 125 दिन हो गया। वहीं, मजदूरी अब हफ्ते-हफ्ते खाते में जायेंगी। सांसद ने कहा कि अब सिर्फ “मिट्टी कोड़ो–गड्ढा भरो” नहीं, बल्कि टिकाऊ और उपयोगी संरचनाओं का निर्माण होगा। डिजिटल भुगतान, जियो-टैगिंग और आधार-आधारित सिस्टम से भ्रष्टाचार पर ब्रेक लगेगी। सांसद बीडी राम ने कहा कि VB-GRAM को सरकार के ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य से जोड़ा गया है। समय के साथ योजनाओं का स्वरूप बदलना जरूरी है, तभी जवाबदेही और सुधार संभव है।
खर्च के आंकड़ों से विपक्ष को जवाब
विपक्ष के आरोपों पर सांसद ने सीधे आंकड़े रखे, उन्होंने कहा कि मनरेगा पर अब तक कुल खर्च 11.74 लाख करोड़ रुपये हुये। मोदी सरकार के कार्यकाल में 8.53 लाख करोड़ रुपये खर्च हुये। इससे यह साफ है कि ग्रामीण रोजगार हमारी सरकार की प्राथमिकता है। सांसद ने विपक्ष पर तंज कसते हुये कहा कि नाम बदलना कोई नई बात नहीं है। 1980 में राष्ट्रीय ग्राम रोजगार कार्यक्रम, राजीव गांधी काल में जवाहर रोजगार योजना, मनमोहन सिंह काल में नरेगा- मनरेगा आया। आज मुद्दे खत्म हो गये हैं, इसलिये नाम पर राजनीति हो रही है। मौके पर भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रघुराज पांडेय, अलखनाथ पांडेय, प्रमोद चौबे, ठाकुर महतो, ओमप्रकाश तिवारी, अंजनी तिवारी, हरेंद्र द्विवेदी, उमेश कश्यप, शिवनारायण चंद्रा, प्रवीण जायसवाल समेत अन्य मौजूद थे।






