Ranchi : रांची की सर्दियों की गुनगुनी धूप में जब छोटे-छोटे पांव खेल के मैदान में उछल रहे थे, तब मानो शिक्षा का असली सार खिलखिला रहा था। कहीं रस्सी कूद की आवाज़ थी, तो कहीं तीन पैरों की रेस में तालमेल बिठाते बच्चे। गोली चम्मच की रेस में छोटे-छोटे हाथ संतुलन साधने की कोशिश कर रहे थे, तो मेढ़क रेस में बच्चों की अठखेलियां देख हर कोई मुस्कुरा रहा था। यह दृश्य किसी रंगीन सपने से कम न था। गांव के स्कूलों से लेकर शहर की गलियों तक, हर सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालय में यह उल्लास गूँज रहा था। यह केवल एक खेल महोत्सव नहीं, बल्कि बचपन की मासूमियत और शिक्षा की मधुरता को महसूस करने का अवसर था।
प्रेरणा बने पंचायत के मुखिया और शिक्षकों का दोस्त
पंचायत के सम्मानित मुखियागण भी इस खुशी में शरीक हुये, बच्चों का हौसला बढ़ाया और शिक्षा के इस नये रूप को सराहा। वहीं, शिक्षकों ने भी पूरे समर्पण के साथ बच्चों को प्रोत्साहित किया। खेल के अंत में विजेताओं को पुरस्कार मिले।इस महोत्सव का असली मकसद यही था—प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि सीखने और आनंद लेने की भावना को जगाना।
DC का मार्गदर्शन, शिक्षा के नये आयाम
रांची के DC मंजूनाथ भजन्त्री के मार्गदर्शन में यह आयोजन शिक्षा के क्षेत्र में एक नई सोच लेकर आया है। खेलों के माध्यम से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रोत्साहित करने की यह पहल आने वाले वर्षों में भी जारी रहेगी।इस महोत्सव ने न केवल शिक्षा को रोचक बनाया, बल्कि यह साबित कर दिया कि खेल सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सीखने और बढ़ने की एक अनमोल विधा है।
(अबुआ साथी-9430328080 – जन शिकायत हेतु रांची जिला प्रशासन का व्हाट्सएप नंबर)














