Kohramlive : जीवन में सफलता मिलने पर आत्मविश्वास बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन जब यही आत्मविश्वास अहंकार में बदल जाए तो पतन की शुरुआत हो जाती है। यही संदेश सदियों पहले महान कूटनीतिज्ञ, अर्थशास्त्री और दार्शनिक आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों में दिया था। आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी लोगों को जीवन जीने की सही दिशा दिखाती हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि कुछ ऐसी चीजें हैं, जिन पर कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए। क्योंकि समय का चक्र ऐसा है कि जो आज आपके पास है, वह कल छिन भी सकता है। आइये जानते हैं उन 5 चीजों के बारे में, जिनका अहंकार इंसान की बर्बादी का कारण बन सकता है।
धन-दौलत का घमंड सबसे बड़ा भ्रम
पैसा जीवन को सुविधाजनक जरूर बनाता है, लेकिन यह हमेशा एक जैसा नहीं रहता। चाणक्य के अनुसार धन की प्रकृति चंचल होती है। आज जो व्यक्ति अमीर है, जरूरी नहीं कि वह हमेशा अमीर ही रहे। जो लोग धन के नशे में गरीबों का अपमान करते हैं और दूसरों को खुद से कमतर समझते हैं, समय आने पर वही लोग कठिन परिस्थितियों का सामना करते हैं। इसलिये धन आने पर विनम्रता और सेवा भाव बनाये रखना ही समझदारी है।
ज्ञान का अहंकार रोक देता है विकास
ज्ञान इंसान को महान बनाता है, लेकिन ज्ञान का अहंकार उसे पतन की ओर ले जाता है। चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति खुद को सर्वज्ञ मानने लगता है, वह नई बातें सीखना बंद कर देता है। ऐसे लोग दूसरों की राय को महत्व नहीं देते और धीरे-धीरे उनकी सोच सीमित हो जाती है। सच्चा ज्ञानी वही है जो सीखने की प्रक्रिया को कभी समाप्त नहीं मानता।
सुंदरता और जवानी हमेशा साथ नहीं रहती
चेहरे की चमक, आकर्षक व्यक्तित्व और युवावस्था पर घमंड करना भी चाणक्य के अनुसार बड़ी भूल है। समय के साथ रूप बदलता है और उम्र का असर हर किसी पर पड़ता है। जो लोग अपनी सुंदरता के कारण दूसरों को तुच्छ समझते हैं या उनका मजाक उड़ाते हैं, वे धीरे-धीरे लोगों के दिलों से दूर हो जाते हैं। चाणक्य का मानना था कि असली सुंदरता इंसान के व्यवहार, संस्कार और विचारों में होती है।
पद और अधिकार का नशा ज्यादा दिन नहीं टिकता
किसी बड़े पद, प्रतिष्ठा या अधिकार पर पहुंचना बड़ी उपलब्धि होती है, लेकिन उसका घमंड करना खतरनाक साबित हो सकता है।
आचार्य चाणक्य के अनुसार पद स्थायी नहीं होता। आज जो कुर्सी आपके पास है, कल किसी और के पास हो सकती है। जो लोग अपने अधिकार का दुरुपयोग करते हैं और दूसरों को अपमानित करते हैं, पद छिनते ही उनका सम्मान भी खत्म हो जाता है।
ताकत का घमंड विनाश का कारण बनता है
चाहे शारीरिक शक्ति हो, राजनीतिक ताकत हो या किसी भी प्रकार की सत्ता, उसका अहंकार व्यक्ति को अंधा बना सकता है। चाणक्य का मानना था कि ताकत का उपयोग कमजोरों की रक्षा के लिए होना चाहिए, न कि उन्हें डराने या दबाने के लिए। इतिहास गवाह है कि कई शक्तिशाली राजा और साम्राज्य केवल अहंकार के कारण मिट गये।
जीवन का सबसे बड़ा आभूषण है विनम्रता
आचार्य चाणक्य का मानना था कि सफलता तभी टिकाऊ बनती है, जब उसके साथ विनम्रता भी जुड़ी हो। धन, रूप, ज्ञान, पद और शक्ति, ये सभी जीवन के महत्वपूर्ण हिस्से हैं, लेकिन इनका अहंकार इंसान को लोगों से दूर कर देता है। इसलिये जितनी ऊंचाई मिले, उतना ही जमीन से जुड़े रहना ही सच्ची बुद्धिमानी है।
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